मेयर संजीव सिंह की बढ़ती लोकप्रियता से सांसद परेशान?By Admin Sun, 19 April 2026 03:18 PM

सुनील सिंह रांची : 7 अप्रैल को मैंने धनबाद कोयलांचल की करवट लेती नई राजनीति के संबंध में लिखा था। यह खबर काफी पढ़ी गई। 66000 व्यू आए। लाइक+कमेंट और शेयर की बाढ़। इससे यह पता चलता है कि धनबाद की राजनीति सचमुच नहीं करवट ले रही है। खबर का असर भी दिखने लगा है। 

धनबाद की राजनीति में एक नई हलचल हर तरफ देखी और सुनी जा रही है। भाजपा सांसद ढुल्लू महतो सचेत हो गए हैं। उन्होंने अपनी रणनीति बदली है। मेयर संजीव सिंह के बढ़ते प्रभाव और लोकप्रियता देख वह परेशानी महसूस कर रहे हैं। इसलिए अब तक जिसकी अपेक्षा की उसे गले लगा रहे हैं। शिकवा-शिकायत दूर कर रहे हैं। पूर्व सांसद पीएन सिंह से मेल-मिलाप बढ़ गया है। उन्हें अभिभावक बताकर अब उनका मार्गदर्शन ले रहे हैं। उन्हें भाजपा के कार्यक्रमों में आमंत्रित कर रहे हैं और सम्मान दे रहे हैं। यही नहीं 14 अप्रैल को सत्तूवानी के मौके पर पीएन सिंह के घर गए। मौका भी था और दस्तूर भी।

इससे आप समझ सकते हैं कि सांसद ने अपनी रणनीति कैसे बदली है। पीएन सिंह से नजदीकी संजीव सिंह की काट में की गई है। अब वह विरोधियों को अपने पक्ष में करने की मुहिम में जुट गए हैं। भाजपा के पुराने नेताओं- कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं। गले लगा रहे हैं।

हालांकि, अभी तक धनबाद विधायक राज सिन्हा से तनातनी कम नहीं हुई है। लेकिन धीरे-धीरे प्रयास इस दिशा में भी हो रहा है। संभव है प्रदेश स्तर के कुछ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद यह मामला भी रास्ता पर आ जाए। 
इधर, मेयर संजीव सिंह का कारवां लगातार बढ़ता जा रहा है। उनके साथ भीड़ बढ़ रही है। सांसद ढुल्लू महतो के प्रभाव क्षेत्र कतरास और बाघमारा इलाके में भी संजीव सिंह और उनके छोटे भाई सिद्धार्थ सिंह की सक्रियता बढ़ गई है। 

जनता श्रमिक संघ को बाघमारा इलाके में सक्रिय करने में सिद्धार्थ जुट गए हैं। बाघमारा में सिद्धार्थ की सक्रियता के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। कहीं सिद्धार्थ बाघमारा से विधानसभा का चुनाव लड़ने की तैयारी में तो नहीं हैं। सक्रियता से तो यही संकेत मिल रहा है। 

बाघमारा संसद का प्रभाववाला और अपना क्षेत्र है। अभी यहां से संसद के छोटे भाई शत्रुघ्न महतो विधायक हैं। तो क्या यह माना जाए कि सिंह मेंशन की नजर अब धनबाद लोकसभा के साथ-साथ बाघमारा विधानसभा क्षेत्र पर भी है। संजीव सिंह की लोकप्रिय और सक्रियता ने सांसद की मुश्किलें बढ़ा दी है। 

इधर, सांसद ढुल्लू महतो भी संजीव सिंह की घेराबंदी और प्रभाव को कैसे कम करें इस दिशा में जुट गए हैं। दोनों तरफ से राजनीति का खेल शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में धनबाद की राजनीतिक दिलचस्प मोड़ पर दिखाई पड़ेगी। इधर, संजीव सिंह के समर्थक शुभम यादव की हत्या से राजनीति गरमा गई है।  तो क्या धनबाद में खूनी संघर्ष का सिलसिला फिर से शुरू होगा क्या। यह बड़ा सवाल है।