
रांची: झारखंड कांग्रेस की नई प्रदेश कमेटी के गठन के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। 314 सदस्यीय नई टीम की घोषणा के कुछ ही दिनों के भीतर नेताओं के इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो गया है, जिससे संगठन में खींचतान तेज हो गई है।
प्रदेश नेतृत्व ने नई कमेटी को सामाजिक संतुलन और संगठनात्मक भागीदारी के आधार पर तैयार करने का दावा किया था, लेकिन कई नेताओं ने खुद को उपेक्षित महसूस करते हुए नाराजगी जाहिर की है।
सबसे पहले राज्य सरकार में मंत्री रहे राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाए। इसके बाद उनके पुत्र प्रशांत किशोर ने प्रदेश सचिव पद छोड़ दिया। अब लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे जगदीश साहू ने भी प्रदेश सचिव पद से इस्तीफा देकर हलचल बढ़ा दी है।
चार बार प्रदेश सचिव रह चुके जगदीश साहू ने कहा कि पार्टी में वर्षों से काम कर रहे समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है। उनका आरोप है कि संगठन में ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है जो पहले से कई पदों पर हैं, जबकि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान नहीं मिला।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ ऐसे चेहरों को संगठन में बड़ी भूमिका दी गई है जिनकी सक्रियता संगठनात्मक कार्यों में पहले सीमित रही है। साहू ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वह पार्टी से जुड़े रहेंगे, लेकिन मौजूदा कमेटी की संरचना से संतुष्ट नहीं हैं।
प्रदेश कांग्रेस में लगातार बढ़ रहे असंतोष को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के भीतर यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में कुछ और पदाधिकारी अपनी नाराजगी सार्वजनिक कर सकते हैं।
नई कमेटी को लेकर उठे सवालों ने यह संकेत दे दिया है कि संगठनात्मक विस्तार के साथ-साथ कांग्रेस को अब अंदरूनी असंतोष को संभालने की भी बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।