
JTET 2026: झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी JTET 2026 को लेकर चल रहा भाषा विवाद अब लगभग साफ होता नजर आ रहा है। जानकारी के अनुसार इस बार की जेटेट परीक्षा में भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को शामिल नहीं किया जाएगा। झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा परीक्षा का विज्ञापन जारी करने और आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब भाषा सूची में बदलाव करना कानूनी और तकनीकी रूप से कठिन माना जा रहा है।
दरअसल, जेटेट 2026 की क्षेत्रीय भाषा सूची में भोजपुरी, मगही और अंगिका को जगह नहीं मिलने के बाद विवाद बढ़ गया था। राज्य के कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इस फैसले का विरोध किया। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की समीक्षा के लिए पांच मंत्रियों की एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया। हालांकि माना जा रहा है कि कमेटी की सिफारिशें अगली जेटेट परीक्षा से लागू हो सकती हैं। मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया में किसी बड़े बदलाव की संभावना बेहद कम है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार परीक्षा प्रक्रिया शुरू होने और विज्ञापन प्रकाशित होने के बाद पात्रता शर्तों या मुख्य सिलेबस में बदलाव करना कानूनी रूप से जोखिम भरा हो सकता है। अगर अब नई भाषाएं जोड़ी जाती हैं तो पूरी चयन प्रक्रिया अदालत में चुनौती के दायरे में आ सकती है। इससे परीक्षा रद्द होने जैसी स्थिति भी बन सकती है। यही वजह है कि सरकार और जैक फिलहाल वर्तमान नियमों के अनुसार ही परीक्षा कराने के पक्ष में नजर आ रहे हैं।
इस मुद्दे को लेकर हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में भी तीखी बहस हुई थी। कांग्रेस कोटे के मंत्री राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय सिंह ने भोजपुरी, मगही और अंगिका को सूची से बाहर रखने पर आपत्ति जताई थी। वहीं भाजपा ने भी सरकार पर भाषाई भेदभाव का आरोप लगाया।
फिलहाल जेटेट 2026 के लिए कार्मिक विभाग द्वारा पहले से अधिसूचित जिलावार क्षेत्रीय भाषाओं की सूची को ही आधार बनाया गया है। इस सूची में भोजपुरी, मगही और अंगिका शामिल नहीं हैं। हालांकि पलामू प्रमंडल में भोजपुरी और मगही, जबकि संथाल परगना के कई इलाकों में अंगिका व्यापक रूप से बोली जाती है। ऐसे में भाषा विवाद आने वाले दिनों में और राजनीतिक रूप ले सकता है।