
नागपुरी फिल्म इंडस्ट्री आज खुशी से झूम रहा है... सेरेंग के रूप में उसे अब तक की सबसे बड़ी हिट फिल्म मिल गई है... जी हां सेरेंग फिल्म को सुपरहिट घोषित कर दिया गया है... फिल्म दूसरे हफ्ते में भी सभी थिएटर्स में हाउसफुल चल रही है... फिल्म में कुछ किरदारों को लेकर विवाद भी हुआ लेकिन ऐसा लगता है कि विवाद का सेरेंग को फायदा ही हुआ... लोग और ज्यादा संख्या में हाल की तरफ आने लगे...
सिरिंज के कामयाबी के पीछे कई बड़ी कर्म बताई जा रहे हैं
फिल्म का बिल्कुल ही ओरिजिनल अंदाज और मजबूत पटकथा
फिल्म विवेक नायक और नितेश कश्यप के रूप में हिट जोड़ी
फिल्म को पूरे झारखंड में कई थिएटर पर एक साथ पांच भाषाओं में रिलीज करना
फिल्म की मार्केटिंग स्ट्रेटजी शानदार रही
आज जब झॉलीवूड सेरेंग की कामयाबी पर झूम रहा है वही यह बात बतानी जरूरी है की झारखंड फिल्म इंडस्ट्री ने बहुत कम ही कामयाबी देखी है...
1992 में आई सोना कर नागपुर पहली नागपुरी फिल्म थी जो रिलीज हुई थी और यह पहली कामयाब फिल्म भी मानी जाती है..
सोना कर नागपुर ने फिल्म निर्माता को नागपुरी फिल्म बनाने के लिए प्रोत्साहित किया
1995 में प्रीत आई जिसके गाने सुपरहिट रहे फिल्म भले उतनी कामयाब नहीं रही..
लेकिन 1998 में सजना अनाड़ी ने एक बार फिर दर्शकों को हाल की तरफ आकर्षित किया
2001 में गुइयाँ नंबर वन और 2005 में सुन सजना ने भी कामयाबी के झंडे गाड़े...
इस बीच 'तोर बिना' 'महुआ' और 'मोर गांव मोर देश' जैसी फ़िल्में भी आई जिन्होंने अपनी लागत किसी ना किसी रूप में वसूल कर ली...
2019 में आई फुलमानिया ने दर्शकों का दिल जीत लिया... यह कई फिल्म फेस्टिवल का भी हिस्सा रही इसके बाद नागपुरी फिल्म उद्योग ने पीछे मुड़कर नहीं देखा...
2019 में आई धूमकुड़िया ने नंदलाल नायक को एक फिल्मकार के रूप में स्थापित किया वहीं झारखंडी संस्कृति को भी फिल्म में एक जगह मिली...
अब तक नए कलाकार नागपुरी फिल्म इंडस्ट्री में आ चुके थे..
2023 में आई तोर प्यार में ने रोमांस को फिल्मी पर्दे पर पेश किया
इसके बाद 2025 में आई लव यू... ने भी दर्शकों का मन मोह लिया
2025 में आई नासूर भी हिट रही और स्थानीय भाषा जानने वाले लोग अब नागपुरी फिल्मों को गंभीरता से लेने लगे...
2026 में आई सेरेंग ने यह साबित कर दिया कि नागपुरी फिल्मों के भी दर्शन हॉल तक आ सकते हैं... सेरेंग की कामयाबी आज सिर्फ नागपुरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए नहीं बल्कि उन सभी कलाकारों के लिए भी एक इंसुलिन का काम करेगी जो यह सोचने लगे थे कि यह फिल्म इंडस्ट्री दम तोड़ रहा है...
दूसरे राज्यों के तुलना में हमारे राज्य में फिल्में कम बनती है हॉल कम मिलते हैं और निर्माता यहां अक्सर पैसा लगाने में डरते हैं लेकिन इस बदलते दौर को सेरेंग ने एक नई दिशा दी है इसके लिए पूरी टीम को बधाई