
सुनील सिंह/ रांची: शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनते ही पश्चिम बंगाल में शासन का इकबाल दिखने लगा है. टीएमसी के गुंडों पर सामत आ गई है. गुंडों की पिटाई हो रही है. जनता भी अब खुलकर सामने आ गई है. पुलिस का एक्शन व नजरिया बदल गया है. एक हफ्ते के अंदर ही बंगाल कानून की राह पर दिख रहा है. कानून व्यवस्था रास्ते पर लौट रही है. पुलिस अपराधियों पर भारी पड़ रही है. अपराधी और टीएमसी के गुंडे जान बचाकर भाग रहे हैं. शासन का भय और इकबाल इतना है कि अपने को पुष्पा घोषित करने वाला व टीएमसी का डॉन कहे जाने वाला फलता से उम्मीदवार जहांगीर खान ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली है. फलता में 21 को मतदान होना है. मतदान से दो दिन पहले जहांगीर ने चुनाव मैदान से हटाने का ऐलान कर दिया. इससे समझ सकते हैं कि बंगाल अब किधर जा रहा है. जहांगीर खान का आतंक और भय की चर्चा होती रही है.
दो दिन पहले मुख्यमंत्री अधिकारी चुनाव प्रचार के लिए फलता गए थे. उन्होंने कहा था, कहां है पुष्पा. मैं पुष्पा को खोजने आया हूं. पुष्पा के आतंक को खत्म कर दूंगा. आप निर्भय होकर मतदान करें. पुष्पा को तो हम देख लेंगे. मुख्यमंत्री की चेतावनी के बाद जहांगीर खान ने मंगलवार को चुनाव मैदान से हटाने का ऐलान कर दिया. टीएमसी के लिए चुनाव पूर्व यह बड़ा झटका है. जहांगीर खान को यह विश्वास हो गया था कि वह चुनाव नहीं जीत सकता है इसलिए उसने मैदान छोड़ने का फैसला लिया. जहांगीर खान अब अपने को बचाने की कोशिश कर रहा है. जहांगीर का चुनाव मैदान से हटाना बड़ी घटना है. इससे समझा जा सकता है बंगाल अब बदल रहा है. एक हफ्ते में ही रिजल्ट दिखने लगा है. आगे_आगे देखिए होता क्या है. सत्ता की हनक दिख रही है. बंगाल में बदलाव की गूंज सुनाई पड़ रही है.