दिल्ली में डीलिस्टिंग को लेकर आदिवासियों का महाजुटान, काँग्रेस- भाजपा में छिड़ा संग्रामBy Admin Sat, 23 May 2026 07:49 PM

RANCHI : झारखंड की राजनीति में उठा डीलिस्टिंग का मुद्दा अब देश की राजधानी दिल्ली तक पहुँच गया है। डीलिस्टिंग के मुद्दे पर भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर दिल्ली के लाल किला मैदान में 24 मई को आयोजित होनेवाले जनजाति सांस्कृतिक समागम में देश के विभिन्न राज्यों से जनजाति समाज के लोग शामिल होंगे। कार्यक्रम का आयोजन जनजाति सुरक्षा मंच की ओर से किया गया है, जबकि समागम को बतौर मुख्य अतिथि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संबोधित करेंगे।इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए झारखंड से भी हजारों की संख्या मे जनजातीय समाज के लोग दिल्ली पहुँच चुके हैं। इस आय़ोजन के माध्यम से लोग जनजातियों के अस्तित्व, परंपरा और संस्कृति की रक्षा के लिए बिरसा मुंडा द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ छेड़े गए उलगुलान आंदोलन के बारे में जानेंगे। साथ ही मतांतरण के विरुद्ध बिरसा मुंडा द्वारा ईसाई मिशनरियों के विरुद्ध छेड़े गए संघर्ष, उनकी ओर से चलाए गए बिरसाइत धर्म और उनके जीवन से जुड़ी अन्य जानकारियों की भी झलक कार्यक्रम में दिखेगी। डीलिस्टिंग के खिलाफ दिल्ली में आयोजित इस माहजुटान पर काँग्रेस और भाजपा के बीच संग्राम छिड़ गया है। काँग्रेस जहां इसे भाजपा पर आदिवासी समाज को गुणराह करने का आरोप लगा रही है वहीं भाजपा का कहना है कि काँग्रेस पार्टी को आदिवासियों का अधिकार मिले इससे कोई मतलब नहीं है। 
कई जगहों से निकलेंगी शोभायात्राएं 
जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक एवं कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि राजकिशोर हांसदा ने बताया कि रविवार 24 मई को दिल्ली में समागम शुरू होने से पूर्व तीन बजे पांच स्थानों से विशेष शोभा यात्राएं निकाली जाएंगी। राजघाट चौक, रामलीला मैदान, अजमेरी गेट चौक, कुदशिला बाग और श्यामगिरि मंदिर से निकलने वाली इन शोभायात्राओं में जनजाति समाज के लोग पारंपरिक वस्त्रों एवं वाद्य यंत्रों के साथ शामिल होंगे।  
आदिवासी समाज को गुमराह करने का प्रयास कर रही है : काँग्रेस 
झारखंड प्रदेश कांग्रेस ने दिल्ली में 24 मई को आयोजित आदिवासी समागम को लेकर आरएसएस और भाजपा पर निशाना साधा है. कांग्रेस ने इसे राजनीतिक ढोंग करार देते हुए कहा कि भाजपा आदिवासी समाज के नाम पर कार्यक्रम आयोजित कर सिर्फ वोटों का लाभ उठाना चाहती है, जबकि जमीन पर उनके अधिकारों को लगातार कमजोर किया जा रहा है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश कहा कि भाजपा बड़े-बड़े कार्यक्रमों के जरिए आदिवासी समाज को गुमराह करने का प्रयास कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि वास्तविक मुद्दों पर केंद्र और राज्य में भाजपा सरकारें खामोश हैं. कांग्रेसी सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत ने कहा कि झारखंड, छत्तीसगढ़ समेत देश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों का हनन हो रहा है. वन अधिकार कानून को कमजोर किया जा रहा है और विस्थापन की घटनाएं बढ़ रही हैं. उन्होंने कहा, "आदिवासी युवाओं में बेरोजगारी बढ़ी है, शिक्षा-स्वास्थ्य की स्थिति बदहाल है. आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई हो रही है. ऐसे में दिल्ली का समागम केवल राजनीतिक दिखावा है. सुखदेव भगत ने केंद्र की भाजपा सरकार पर सरना धर्म कोड को लेकर गंभीरता न दिखाने का आरोप लगाया. उन्होंने याद दिलाया कि झारखंड विधानसभा से इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा जा चुका है, फिर भी इसे वर्षों से लंबित रखा गया है.
सरना और सनातन एक नहीं : रामेश्वर उरांव 
विधायक एवं पूर्व वित्तमंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि दिल्ली का यह कार्यक्रम आदिवासियों की वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने का प्रयास है. जंगलों की कटाई, भूमि अधिग्रहण और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से सबसे अधिक आदिवासी समुदाय प्रभावित हो रहा है. रामेश्वर उरांव ने स्पष्ट किया, "सरना और सनातन एक नहीं हैं." उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अब भाजपा की कथनी और करनी के अंतर को अच्छी तरह समझ चुकी है. आदिवासी समाज अब नारों से नहीं, बल्कि अधिकार और सम्मान की राजनीति चाहता है.
अपनी दुकानदारी बंद होने से कांग्रेस चिंतित और हताश : बाबूलाल मरांडी
दिल्ली में हो रहे आदिवासी समागम का कांग्रेस द्वारा विरोध करने पर पूर्व मुख्यमंत्री सह नेता  प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आदिवासी समागम के आयोजन से भला कांग्रेस के पेट में दर्द क्यों ? साफ है कि देश भर में अपनी दुकानदारी बंद होने से कांग्रेस चिंतित और हताश है। श्री मरांडी ने कहा कि लोकतंत्र में कोई भी संगठन चाहे वह सामाजिक हो या राजनीतिक, हर किसी को अपनी मांग को लेकर प्रखंड, जिला, प्रदेश या देश की राजधानी में धरना, प्रदर्शन, सम्मेलन, जुलूस करने की स्वतंत्रता है, उनको यह अधिकार मिला हुआ है। यह समझ से परे है कि कांग्रेस इसका क्यों विरोध कर रही है। अगर कोई संगठन अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन या  सम्मेलन कर रहे हैं और इससे किसी को आपत्ति हो रही है तो स्वाभाविक है वह अपनी बंद होती दुकानदारी से चिंतित है। श्री मरांडी ने कहा कि अनुसूचित जनजाति सुरक्षा मार्च, अनुसूचित जनजाति भाई बहनों के हितों की रक्षा के लिए बना हुआ है। उनकी रक्षा या सुरक्षा में कहीं कोई चूक हो रही है और वे सरकार के समक्ष धरना प्रदर्शन या सम्मेलन कर रहे हैं तो मुझे लगता है कि कांग्रेस पार्टी को दर्द नहीं होनी चाहिए। श्री मरांडी ने कहा कि जहां तक आरएसएस को मंच पर बुलाने की बात है तो आरएसएस कोई विदेश का संगठन नहीं है और ना ही देशद्रोहियों का संगठन है बल्कि यह देशभक्तों का संगठन है। अगर देशभक्तों के संगठन से कोई अन्य संगठन जुड़ना चाहता है या जुड़ा हुआ है तो इसका स्वागत होना चाहिए।