रिम्स-2 को लेकर तैयारी तेज, 4200 करोड़ की लागत से बनेगा सुपर स्पेशियलिटी हेल्थ हबBy Admin Mon, 25 May 2026 07:02 PM

Ranchi: राजधानी रांची मे रिम्स-2 के निर्माण को लेकर झारखंड सरकार ने तैयारी तेज कर दी है। इसी कड़ी मे सोमवार को स्वास्थ्य विभाग और एशियन डेवलपमेंट बैंक के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक मे ते हुआ कि रिम्स-2 का निर्माण 4200 करोड़ की लागत से कराया जाएगा। जिसमें लगभग 2600 करोड़ रुपये का लोन एडीबी उपलब्ध कराएगा. सरकार की योजना रिम्स-2 को केवल अस्पताल नहीं बल्कि आधुनिक चिकित्सा, रिसर्च, मेडिकल एजुकेशन और सुपर स्पेशियलिटी सुविधाओं से लैस एक समग्र स्वास्थ्य संस्थान के रूप में विकसित करने की है. अधिकारियों के मुताबिक निर्माण कार्य दिसंबर 2026 या जनवरी 2027 से शुरू हो सकता है. राज्य सरकार का दावा है कि यह परियोजना झारखंड की स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदल देगी.
एडीबी की फैक्ट फाइंडिंग टीम ने रिम्स-2 परियोजना की विभिन्न पहलुओं पर समीक्षा की
स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में एडीबी की फैक्ट फाइंडिंग मिशन टीम ने रिम्स-2 परियोजना की विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत समीक्षा की. बैठक में अस्पताल की क्षमता, भवन निर्माण योजना, तकनीकी ढांचा, वित्तीय प्रबंधन, सामाजिक और पर्यावरणीय सुरक्षा मानकों सहित भविष्य की स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए चर्चा हुई. एडीबी की टीम ने परियोजना की प्रशासनिक तैयारियों और तकनीकी आवश्यकताओं का आकलन कर कई सुझाव भी दिए. अधिकारियों ने बताया कि अगले छह महीनों के भीतर लोन प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताओं को अंतिम रूप देने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि तय समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य शुरू किया जा सके.
रिम्स-2 में मिलेगी विश्व स्तरीय सुविधा : अजय कुमार सिंह 
बैठक में अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि रिम्स-2 को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल का डिजाइन, इंफ्रास्ट्रक्चर, मेडिकल टेक्नोलॉजी और कंसल्टेंसी पूरी तरह वर्ल्ड क्लास स्तर की होगी. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि झारखंड के लोगों को गंभीर इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े. रिम्स-2 में सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा सेवाओं के साथ मेडिकल शिक्षा और रिसर्च की भी अत्याधुनिक व्यवस्था की जाएगी. सरकार की कोशिश है कि यह संस्थान पूर्वी भारत के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों में शामिल हो सके. अधिकारियों ने यह भी बताया कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समय सीमा दोनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी.
दो वर्षों में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य
सरकार ने रिम्स-2 परियोजना को तय समय सीमा के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है. बैठक में अपर मुख्य सचिव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना के हर चरण की गंभीरता से मॉनिटरिंग की जाए और किसी प्रकार की देरी न हो. जानकारी दी गई कि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इसे दो वर्षों के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जाएगा. परियोजना के सफल संचालन के लिए तकनीकी विशेषज्ञों और कंसल्टेंट्स की नियुक्ति, फंड फ्लो मैनेजमेंट और फाइनेंशियल ड्यू डिलिजेंस जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई.
“सेल्फ सस्टेनिंग मॉडल” पर विकसित होगा अस्पताल
बैठक में रिम्स-2 को “सेल्फ सस्टेनिंग मॉडल” पर विकसित करने को लेकर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ. अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि अस्पताल की संचालन व्यवस्था ऐसी बनाई जाए, जिससे संस्थान भविष्य में आर्थिक रूप से मजबूत बना रहे और स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार हो सके. बैठक में लोन रेडीनेस, कंसल्टेंट चयन की समयसीमा, ईएमई वर्कशॉप से मिली सीख, फाइनेंशियल सस्टेनेबिलिटी एनालिसिस, एनवायरमेंटल सेफगार्ड और स्टाफिंग पैटर्न जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई. इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के उप सचिव ध्रुव प्रसाद, जेएसबीसीसीएल के अधिकारी, विभागीय पदाधिकारी और एडीबी के प्रतिनिधि मौजूद रहे.