राज्यसभा चुनाव : 56 इंच का सीना फिर भी छूट रहा है पसीना..By Admin Tue, 26 May 2026 02:15 PM

GYAN RANJAN 
रांची: झारखंड में दो सीटों के लिए होने जा रहे राज्यसभा चुनाव को लेकर सूबे की राजनीति में नौतपा लगा हुआ है। जैसे 25 मई से लेकर 2 जून तक मौसम का नौतपा है, यानि इन नौ दिनों में भीषण गर्मी पड़ेगी उसी तरह से राज्य की राजनीति भी राज्यसभा चुनाव को लेकर पूरी तरह से गरमाई हुई है। राज्य की सत्ताधारी गठबंधन के पास दोनों सीट निकालने के लिए पर्याप्त संख्या है इसके बावजूद महागठबंधन मे डर समाया हुआ है। डर भी एक नहीं बल्कि अनेक तरह के समाए हुए हैं। पहला डर तो भाजपा ने प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर झामुमो को दे दिया है वहीं दूसरा डर काँग्रेस पार्टी को अपनी ही सहयोगी पार्टी झामुमो से लग रहा है। एक वाक्य मे कहें तो राज्यसभा चुनाव को लेकर इंडिया गठबंधन का हाल 56 इंच का सीना फिर भी छूट रहा है पसीना वाली हो गई है। जेएमएम ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा द्वारा खरीद-फरोख्त किए जाने तथा विधायकों के भयादोहन करने की आशंका जताई है। पार्टी के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने इसे लेकर भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पत्र भेजकर यह आशंका प्रकट की है।


झामुमो ने बीजेपी नेताओं की घोषणा को बताया आधार 

सुप्रियो भट्टाचार्य ने इसका आधार आवश्यक संख्या बल नहीं होते हुए भी नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू की ओर से सार्वजनिक रूप से राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार देने की घोषणा को बताया है। उन्होंने इसे लेकर केंद्रीय और राज्य की एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।
झामुमो महासचिव ने अपने पत्र में कहा है कि वर्तमान में राज्यसभा चुनाव में किसी उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के 28 मत चाहिए। इस तरह, दोनों सीट के लिए कुल 28 विधायकों का मत चाहिए, जो सत्तारूढ़ गठबंधन के पास उपलब्ध है। यह भी बताया है कि विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन में से झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के चार तथा भाकपा माले के दो विधायक हैं।
जेएमएम महासचिव का कहना है मुख्य विपक्षी दल भाजपा के पास महज 21 विधायक हैं। इसके बाद भी भाजपा की ओर से चुनाव में उम्मीदवार देने की घोषणा करना यह इशारा करता है, उनकी ओर से चुनाव में विधायकों को आर्थिक प्रलोभन, अनैतिक दबाव उत्पन्न कर और भयादोहन कर अपने पक्ष में मतदान करने के लिए मजबूर किया जा सकता है। इसलिए निर्वाचन आयोग राज्यसभा चुनाव भ्रष्टाचार और भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराने के लिए केंद्रीय एजेंसियों को निर्देश दे और नजर रखे। आयोग सीबीआई, ईडी, राजस्व खुफिया निदेशालय, केंद्रीय सतर्कता आयोग और राज्य सरकार के अधीन भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, झारखंड को आवश्यक सतर्कता बरतने के निर्देश दे। उन्होंने इसकी प्रति राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को भी भेजी है।
काँग्रेस को नहीं है झामुमो पर भरोसा 
दूसरी तरफ सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रमुख दल काँग्रेस पार्टी को झामुमो पर ही भरोसा नहीं है। इस बात की ताकीद काँग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रदीप कुमार बलमुचू का बयान कर रहा है। राज्यसभा के लिए होने जा रही दो सीटों के चुनाव में काँग्रेस पार्टी गठबंधन मे एक सीट की मांग कर रही है, लेकिन उन्हें शंका है कि झामुमो सीट देने में खेला कर सकता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रदीप बलमुचू को आशंका है कि झामुमो की कथित चालाकी से भाजपा एक सीट हथिया सकती है. कहा कि हेमंत सोरेन पहली बार कांग्रेस की मदद से ही राज्यसभा पहुंचे थे. उस समय धीरज प्रसाद साहू के साथ हेमंत सोरेन कांग्रेस के समर्थन से चुनाव जीतकर राज्यसभा सांसद बने थे. बलमुचू ने कहा, “हमारी मंशा हमेशा सहयोगी दलों के साथ चलने की रही है, लेकिन सहयोगी दल का व्यवहार कैसा रहा, इस पर कांग्रेस आलाकमान को गंभीरता से विचार करना चाहिए.” प्रदीप बलमुचू ने आरोप लगाया कि पिछले तीन बार राज्यसभा चुनाव यानि वर्ष 2020, 2022 और 2024 में झामुमो ने कांग्रेस के हक पर डाका डाला है. पहली बार शिबू सोरेन को राज्यसभा भेजा गया. दूसरी बार सोनिया गांधी से आश्वासन मिलने के बाद भी हेमंत सोरेन ने महुआ माजी के नाम की घोषणा कर दी. तीसरी बार सरफराज अहमद को गांडेय से इस्तीफा दिलवाकर अपनी पत्नी को विधानसभा चुनाव लड़वाने के लिए राज्यसभा भेजा गया.बलमुचू ने कहा, “आप (झामुमो) तीन बार हमारी जगह गए, जबकि उस समय संख्या बल के हिसाब से एक सीट महागठबंधन और एक भाजपा के पास जाती. अब तो स्थिति पूरी तरह महागठबंधन के पक्ष में है.” प्रदीप बलमुचू ने विधायकों की संख्या का जिक्र करते हुए कहा कि झामुमो अपने उम्मीदवार के लिए 29 वोट सुरक्षित रखना चाहेगा, जिसके बाद उसके पास सिर्फ 5-6 सरप्लस वोट बचेंगे. वहीं कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं. उन्होंने जोर देकर कहा, “झामुमो सिर्फ एक राज्यसभा सीट का हकदार है. दूसरी सीट पर कांग्रेस का पुख्ता दावा है.”
झामुमो की चालाकी से होगा भाजपा को फायदा 
कांग्रेस नेता ने आशंका जताई कि झामुमो अपनी राजनीतिक चालाकी से भाजपा को एक सीट गिफ्ट कर सकता है. “इन लोगों की मंशा ठीक नहीं है. ये अपनी चालाकी के चलते भाजपा के उम्मीदवार को जिता सकते हैं,” बलमुचू ने झामुमो के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि गठबंधन का सहयोगी होने के बावजूद झामुमो का स्टैंड कई बार शंका पैदा करने वाला रहा है. असम में भाजपा-कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई थी, लेकिन झामुमो के मैदान में उतरने से कांग्रेस को 18 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा. बंगाल में झामुमो तृणमूल कांग्रेस के लिए प्रचार करती है. उन्होंने पूछा, “झामुमो को केंद्र की राजनीति से क्या लेना-देना?”
भाजपा ने किया झामुमो के बयान का स्वागत 
राज्यसभा चुनाव की निगरानी केन्द्रीय जांच एजेंसियों से कराए जाने की मांग झामुमो द्वारा निर्वाचन आयोग से कराए जाने का भाजपा ने स्वागत किया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरंडी ने मंगलवार को कहा कि देर से ही सही झामुमो को सद्बुद्धि आई है। उन्होनें कहा कि भाजपा झामुमो की मांग का स्वागत करती है। चुनाव निश्चित रूप से साफ सुथरी होनी चाहिए। 
झारखंड का इतिहास: यहाँ सीधा अंकगणित हमेशा फेल रहा है
झारखंड में राज्यसभा चुनाव का इतिहास गवाह है कि यहाँ साधारण अंकगणित (एक-एक नियम) के भरोसे चुनाव नहीं जीते जाते। अतीत के इन दो चुनावों ने सबको चौंकाया था। साल 2008 के चुनाव में कम वोट पाकर भी जीते थे परिमल नाथवाणी। भाजपा के जे.पी.एन. सिंह प्रथम वरीयता के 35 मत लेकर आसानी से जीते थे। लेकिन असली मुकाबला दूसरी सीट पर था। निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी को प्रथम वरीयता के मात्र 16 मत मिले थे, जबकि आर.के. आनंद को 17 मत मिले थे। इसके बावजूद नाथवाणी ने दूसरी वरीयता के मतों के आधार पर आर.के. आनंद को शिकस्त दे दी।
दिलचस्प बात यह थी कि झामुमो के पास विधानसभा में 17 सदस्य थे, लेकिन उनके अधिकृत उम्मीदवार किशोरी लाल को मात्र 8 मत ही मिले थे। 
साल 2014 का चुनाव: निर्विरोध निर्वाचन का दांव
इस समय राज्य में झामुमो, कांग्रेस और राजद की सरकार थी, जबकि विपक्ष में भाजपा-आजसू गठबंधन था। राजद के पास केवल 5 विधायक थे, लेकिन उन्होंने प्रेमचंद गुप्ता को उतारा। वहीं भाजपा-आजसू के समर्थन से परिमल नाथवाणी फिर स्वतंत्र उम्मीदवार बने। अंकगणित ऐसा बैठा कि तीसरा उम्मीदवार मैदान में आ ही नहीं पाया और दोनों निर्विरोध चुन लिए गए।