JSBC की टालमटोल नीति पर हाई कोर्ट ने लगाई फटकार, पूर्व न्यायाधीश एन.एन. तिवारी मीडियेटर नियुक्तBy Admin Sat, 30 May 2026 12:25 PM

Ranchi : झारखंड हाई कोर्ट ने झारखंड स्टेट बेवरेजेस कॉरपोरेशन ( JSBC ) को कड़ी फटकार लगाई है। हाई कोर्ट ने एक मध्यस्थता के मामले में सुनवाई के दौरान बार बार समय की मांग करने पर JSBC पर नाराजगी जाहीर की है।  हाईकोर्ट ने इस केस की सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कॉरपोरेशन मामले को लटकाने पर आमादा है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनाक ने मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एनएन तिवारी को के.एस. मल्टी फैसिलिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और जेएसबीसी के बीच विवाद के निपटारे के लिए मध्यस्थ नियुक्त किया है.

बिवरेज कॉरपोरेशन के तर्क को अतार्किक बताया 
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस की कोर्ट ने झारखंड स्टेट बेवरेजेस कॉरपोरेश की ओर से दिए गए तर्कों को पूरी तरह से अतार्किक और असंतोषजनक पाया. दरअसल झारखंड स्टेट बेवरेजेस कॉरपोरेशन ने अपने प्रबंध निदेशक के तबादले का हवाला देकर दूसरी बार सुनवाई टालने की गुहार लगाई थी. जिसपर कोर्ट ने याद दिलाया कि इससे पहले भी 10,000 रुपए के जुर्माने की शर्त पर स्थगन दिया गया था. जिसे कॉरपोरेशन ने अब तक जमा नहीं किया है. अदालत ने कहा कि प्रबंध निदेशक का तबादला होना 10,000 रुपए का जुर्माना न भरने का बहाना नहीं हो सकता. हाईकोर्ट ने कहा कि झारखंड स्टेट बेवरेजेस कॉरपोरेशन जानबूझकर देरी कर रहा है. यह विवाद 19 जून 2024 को दो पक्षों के बीच हुए एक समझौते से जुड़ा है. के.एस. मल्टी फैसिलिटी सर्विसेज ने 2025 में हाई कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की थी. जिसका झारखंड स्टेट बेवरेजेस कॉरपोरेशन ने यह कहकर विरोध किया था कि समझौते में मध्यस्थता का क्लॉज मौजूद है. इसके बाद 19 सितंबर 2025 को याचिका वापस लेकर कंपनी ने 4 अक्टूबर 2025 को कानूनी नोटिस के जरिए मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू की. लेकिन झारखंड स्टेट बेवरेजेस कॉरपोरेश ने न तो नोटिस का जवाब दिया और न ही मध्यस्थ की नियुक्ति पर सहमति जताई.
हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक संवैधानिक पीठ के फैसले का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि इस स्तर पर अदालत को केवल यह देखना है कि क्या दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता का कोई समझौता अस्तित्व में है या नहीं. कोर्ट ने अन्य सभी आपत्तियों पर विचार करने का अधिकार मध्यस्थता न्यायाधिकरण पर छोड़ दिया है.