
रांची: सरना धर्म कोड को लेकर आदिवासी समाज के भीतर चल रही बहस के बीच केंद्रीय सरना समिति से जुड़े खाटी आदिवासियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखी। समिति के नेताओं ने कहा कि सरना धर्म की अपनी अलग पहचान है और इसे किसी अन्य धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए फूलचंद तिर्की ने कहा कि कुछ लोग सरना और सनातन को एक बताने के साथ-साथ सरना और ईसाई समुदाय को भी एक ही मां की संतान कह रहे हैं, जो तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे बयान देने वाले लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का काम कर रहे हैं तथा भोले-भाले आदिवासियों को गुमराह कर रहे हैं।
फूलचंद तिर्की ने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है, जिसके लिए लंबे समय से सरना धर्म कोड की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने के मद्देनजर आदिवासी समाज से अपील की जाएगी कि वे धर्म के कॉलम में "सरना" दर्ज कराएं।
उन्होंने कहा कि यदि बड़ी संख्या में लोग अपनी धार्मिक पहचान सरना के रूप में दर्ज करेंगे तो सरना धर्म कोड की मांग को और मजबूती मिलेगी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं ने आदिवासी समाज से एकजुट होकर अपनी परंपराओं, संस्कृति और धार्मिक पहचान के संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया।