
डुमरी: सरकार और जिला प्रशासन आदिम जनजाति परिवारों के विकास और कल्याण के चाहे जितने बड़े-बड़े दावे कर ले, लेकिन धरातल पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट और भयावह है। ताजा मामला गुमला जिले के आकांक्षी प्रखंड डुमरी के उदनी पंचायत अंतर्गत ग्राम औरापाठ माचाडीपा का है। इस गांव को जिला प्रशासन द्वारा एक 'आदर्श गांव' के रूप में गोद लिया गया है और यहां अक्सर उपायुक्त का आवागमन भी होता है। इसके बावजूद, यह इलाका आज भी विकास से कोसों दूर है और यहां के आदिम जनजाति परिवार दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, गुमला के तहत जिला अनबद्ध निधि से औरापाठ माचा डीपा में ₹13,42,184.00 (तेरह लाख बयालीस हजार एक सौ चौरासी रुपये) की लागत से सोलर आधारित पेय जलापूर्ति योजना का निर्माण कराया गया था। इसका ठेका गुमला के संवेदक 'हीरा कंस्ट्रक्शन' को मिला था। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने पठारी क्षेत्र का गलत फायदा उठाते हुए बेहद घटिया और भ्रष्ट कार्य किया है। योजना शुरू होने के महज एक महीने के भीतर ही जलापूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। टंकी निर्माण के बाद भी अब उसमें पानी नहीं चढ़ रहा है।बुजुर्ग ग्रामीण मानु कोरवा और श्रीमती कोरवाइन ने बताया कि यह योजना करीब 3 महीने पहले बनी है।
कूप के निर्माण के लिए ग्रामीणों से स्थान तक नहीं पूछा गया। ठेकेदार ने कुएं को एक ऐसी नाली के पास बना दिया है, जहां बारिश होने पर नाली का सारा कचरा और गंदा पानी कुएं में समा जाएगा।कुएं को गहरा करने के बजाय अगल-बगल बिखरे फालतू पत्थरों को डालकर ढांचा खड़ा कर दिया गया है। ऊपर से बस थोड़ा सा सीमेंट लगाकर खानापूर्ति कर दी गई है।कुआं तो खड़ा कर दिया गया, लेकिन ठेकेदार द्वारा इसमें अभी तक सोलर पैनल जंगल जैसे जगहों में लगा दिया गया है।ग्रामीणों ने दर्द बयां करते हुए कहा कि वे दिनभर मजदूरी करने या जंगल में लकड़ी चुनने जाते हैं। शाम को थक-हारकर लौटने के बाद उन्हें पानी के लिए 1 किलोमीटर दूर घनघोर जंगल के भयावह रास्तों से होकर 'दारी' पर जाना पड़ता है।
रात के अंधेरे में पानी लाते समय कई बार ग्रामीणों का सामना खतरनाक जंगली जानवरों से हो जाता है, जिससे हमेशा जान का खतरा बना रहता है।ग्रामीणों में प्रशासन और ठेकेदार के खिलाफ भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि भारी-भरकम अग्रिम राशि मिलने के बावजूद ठेकेदार ने आदिम जनजाति परिवारों के हक पर डाका डाला है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और उपायुक्त से मांग की है कि इस भ्रष्ट कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, दोषी ठेकेदार पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो और उन्हें पीने के साफ पानी की स्थायी सुविधा दी जाए।इस दौरान विरोध जताते हुए मौके पर दुर्गा कोरवा, श्रीमती कोरवा, अश्मिता देवी, संध्या बाई, मनु कोरवा, राकेश कोरवा, मदन कोरवा, भैरव कोरवा, आनंद कोरवा, रामदयाल कोरवा सहित भारी संख्या में अन्य ग्रामीण उपस्थित थे।