
झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो गया है। नामांकन के अंतिम दिन झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम, कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत इंडिया गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। तीनों उम्मीदवारों के नामांकन के साथ ही राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं।
नामांकन के बाद झामुमो के केंद्रीय सचिव एवं प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा ने आज तक झारखंड से किसी दलित नेता को राज्यसभा नहीं भेजा है। उन्होंने कहा कि बैद्यनाथ राम स्थानीय नेता होने के साथ-साथ दलित समाज की मजबूत आवाज हैं। उनके राज्यसभा पहुंचने से झारखंड के दलित समाज को प्रभावी प्रतिनिधित्व मिलेगा।
सुप्रियो भट्टाचार्य ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नामांकन दाखिल करना और चुनाव जीतना दो अलग-अलग बातें हैं। साथ ही भाजपा से यह स्पष्ट करने की मांग की कि उसके विधायक किस उम्मीदवार का समर्थन करेंगे।
वहीं, निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने अपनी जीत को लेकर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि वे जोड़-तोड़ की राजनीति में विश्वास नहीं रखते और उन्हें विभिन्न राजनीतिक दलों तथा समाज के सभी वर्गों का समर्थन मिलने की उम्मीद है। नाथवानी ने कहा कि पिछले दो कार्यकालों के दौरान उन्होंने झारखंड के विकास, बुनियादी ढांचे और सामाजिक क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।
इस बार राज्यसभा चुनाव में सामाजिक प्रतिनिधित्व और विकास दोनों प्रमुख मुद्दे बनकर उभरे हैं। एक ओर इंडिया गठबंधन बैद्यनाथ राम को सामाजिक न्याय और दलित प्रतिनिधित्व का प्रतीक बता रहा है, वहीं दूसरी ओर परिमल नाथवानी अपने विकास कार्यों और अनुभव के आधार पर समर्थन जुटाने में लगे हैं।
अब सभी की नजरें राज्यसभा चुनाव के परिणाम पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव में सामाजिक समीकरण प्रभावी साबित होते हैं या विकास का मुद्दा जनप्रतिनिधियों को अधिक प्रभावित करता है। आने वाले दिनों में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।