
रामगढ़, झारखंड: सिविल कोर्ट रामगढ़ के सरकारी अधिवक्ता (गवर्नमेंट प्लीडर) श्री संजीव कुमार अम्बष्ठ ने झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजकर राज्यभर में वर्षों से लंबित खनन संबंधी नीलाम ...पत्र वादों (Certificate Cases) के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष पहल करने की मांग की है।
अपने प्रस्ताव में श्री अम्बष्ठ ने कहा है कि झारखंड के विभिन्न जिलों में खान एवं भू-विज्ञान विभाग द्वारा खनिज राजस्व की वसूली के लिए बिहार एवं उड़ीसा लोक मांग वसूली अधिनियम, 1914 के तहत बड़ी संख्या में नीलाम-पत्र वाद दायर किए गए हैं। इन मामलों में रॉयल्टी, डेड रेंट, सरफेस रेंट, ब्याज एवं जुर्माना आदि की वसूली से संबंधित दावे शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि राज्य के विभिन्न जिलों में हजारों नीलाम -पत्र वाद कई वर्षों से लंबित पड़े हुए हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है जिनमें बकाया राशि ₹1 लाख या उससे कम है। ये मामले मुख्य रूप से पत्थर खदान संचालकों, बालू घाट पट्टाधारकों, लघु खनिज व्यवसायियों एवं छोटे उद्यमियों से जुड़े हुए हैं।
श्री अम्बष्ठ ने कहा कि लंबी न्यायिक एवं प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण छोटे व्यवसायियों को बार-बार कार्यालयों और न्यायालयों का चक्कर लगाना पड़ता है। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान, अतिरिक्त कानूनी खर्च तथा समय की बर्बादी का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में मुकदमेबाजी पर होने वाला खर्च मूल बकाया राशि के बराबर या उससे अधिक हो चुका है।
उन्होंने यह भी कहा कि इन मामलों के लंबित रहने से सरकार को भी राजस्व की समय पर प्राप्ति नहीं हो पा रही है। यदि इन मामलों का सामूहिक एवं व्यवस्थित तरीके से समाधान किया जाए तो सरकार को बड़ी मात्रा में लंबित राजस्व शीघ्र प्राप्त हो सकता है।
मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में निम्नलिखित प्रमुख मांगें की गई हैं—
राज्य के सभी उपायुक्तों, नीलाम -पत्र पदाधिकारियों एवं खान एवं भू-विज्ञान विभाग के अधिकारियों को निर्देश देकर ₹1 लाख तक की राशि वाले लंबित नीलाम -पत्र वादों की पहचान एवं पृथक्करण कराया जाए।
ऐसे छोटे एवं पुराने मामलों के समाधान के लिए विशेष समझौता एवं सुलह तंत्र विकसित किया जाए।
छोटे मामलों को आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत एवं अन्य लोक अदालतों के समक्ष प्रस्तुत कर आपसी सहमति से निपटारा कराया जाए।
जहां विधिक रूप से संभव हो, वहां ब्याज एवं दंडात्मक राशि में उचित छूट देकर शीघ्र समझौते को प्रोत्साहित किया जाए।
पत्थर, बालू तथा अन्य लघु खनिजों से संबंधित वर्षों से लंबित मामलों के निपटारे के लिए विशेष राज्यव्यापी अभियान चलाया जाए।
श्री अम्बष्ठ ने कहा कि इस प्रकार की पहल से सरकार को लंबित राजस्व की वसूली में तेजी आएगी, छोटे व्यवसायियों को वर्षों पुराने विवादों से राहत मिलेगी, नीलाम -पत्र न्यायालयों एवं सरकारी कार्यालयों पर लंबित मामलों का बोझ कम होगा तथा सुशासन एवं संवेदनशील प्रशासन की दिशा में एक सकारात्मक संदेश जाएगा।
उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि जनहित एवं राजस्व हित को ध्यान में रखते हुए ₹1 लाख तक की राशि वाले लंबित खनन नीलाम -पत्र मामलों के लिए राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से विशेष निपटारा योजना लागू करने हेतु आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।
इस संबंध में प्रतिलिपि झारखंड सरकार के खान एवं भू-विज्ञान विभाग के सचिव तथा निदेशक को भी भेजी गई है ताकि विषय पर शीघ्र आवश्यक कार्रवाई की जा सके।