राज्यसभा चुनाव : नाथवानी के नामांकन पर अंदर बहस, बाहर प्रदर्शन और नारेबाजी By Admin Wed, 10 June 2026 08:17 PM

Ranchi: झारखंड विधानसभा परिसर में बुधवार को वो नजारा देखने को मिल जो कभी विधानसभा सत्र के दौरान भी देखने को नहीं मिल था। दरअसल राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर काँग्रेस के द्वारा उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष मंगलवार को स्कूटनी के दौरान कुछ आपत्ति दर्ज कराई गई थी। दर्ज आपती पर आज रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष दोनों पक्ष को अपनी-आपनी दलील रखनी थी। इसके लिए 11 बजे का समय निर्धारित किया गया था। लगभग साढ़े 10 बजे काँग्रेस ने मंत्री, विधायक सहित दर्जनों कार्यकर्ता विधानसभा पहुंचे और उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन शुरू कर दिया। जब उन्हें वहाँ से हटाया गया तो सभी विधानसभा के गते नंबर 2 के समक्ष आकार नारेबाजी और प्रदर्शन करने लगे। इसी बीच भाजपा के कार्यकर्ता भी विधानसभा पहुँच गए, लेकिन उन्हें बाहर ही रोक दिया गया। इससे नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं ने जहां उन्हें रोक गया था वहीं नारेबाजी शुरू कर दिए। लगभग आधे दर्जन के करीब कार्यकर्ता अंदर घुसने में सफल तो हो गए थे लेकिन उन्हें पुलिस के साथ बहस करते देखा गया। भाजपा नेत्री सीमा सिंह अपने चार-पाँच कार्यकर्ताओं के साथ गते नंबर 2 के पोर्टिको तक पहुँचने में सफल हो गई। इसके बाद भाजपा और काँग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया। 
इधर बाहर मे भाजपा और काँग्रेस का हंगामा चल ही रहा था कि वरक्षतः वकील सलमान खुरसीद विधानसभा पहुंचे। वे सीधे जहां सुनवाई चल रही थी वहाँ पहुँच गए लेकिन उन्हें सुनवाई स्थल तक नहीं जाने दिया गया। यह देख काँग्रेस के मंत्री और विधायक आपे से बाहर हो गए। मंत्री दीपिका पांडे सिंह, शिल्पी नह तिर्की, इरफान अंसारी, राधाकृष्ण किशोर, राजेश कश्यप, अनूप सिंह सभी इसका विरोध करने लगे। काँग्रेस के मंत्रियों और विधायकों का आरोप था कि चुनाव अधिकारी द्वारा उनकी बातों को नहीं सुन जा रहा है। हमारे वकील तक को समय नहीं दिया गया। चुनाव अधिकारी के कार्यालय के समक्ष जो विधानसभा के सुरक्षा अधिकारी थे उन्हे भी इनलोगों ने खूब भला-बुरा कहा। 
स्क्रूटनी के दौरान वकीलों में तीखी बहस

इधर राज्यसभा चुनाव की सरगर्मियों के बीच निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवाणी के नामांकन पत्र को लेकर कानूनी लड़ाई तेज हो थी।स्क्रूटनी के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों के बीच जबरदस्त कानूनी दलीलें देखने को मिली. एक तरफ जहां काँग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा के वकील ने नाथवाणी के शपथ पत्र में गंभीर कमियां गिनाते हुए नामांकन रद्द करने की मांग की, वहीं परिमल नाथवाणी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अपने पक्ष को पूरी तरह वैध बताया.
नाथवाणी के वकील प्रशांत पल्लव की दलील
परिमल नाथवाणी का पक्ष रखते हुए उनके अधिवक्ता प्रशांत पल्लव ने स्क्रूटनी की प्रक्रिया को पूरी तरह नियमसंगत बताया. उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष कई बिंदु रखे. उन्होनें कहा कि विपक्षी दल की आपत्ति का मुख्य फोकस सिर्फ इस बात पर था कि आश्रितों (डिपेंडेंट) का कॉलम खाली था, जिसका हमने तार्किक जवाब दे दिया है.सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार, स्क्रूटनी की तिथि तक उम्मीदवार अपनी बात या जवाब रख सकता है. नामांकन तब रद्द किया जाता है जब रिमाइंडर (याद दिलाने) के बाद भी प्रत्याशी जवाब न दे. उन्होनें कहा कि हमारे उम्मीदवार ने समय रहते सारी आवश्यक जानकारियां उपलब्ध करा दी थी और पूरी प्रक्रिया को समय पर पूरा किया गया है. हमने कानूनन अपनी सही बात रख दी है, अब निर्णय का इंतजार है.
प्रणव झा के वकील सुरेंद्र चौहान की दलीलः त्रुटियों की भरमार, रिटर्निंग ऑफिसर ने की पक्षपात की कोशिश
प्रणव झा के वकील ने कहा कि फॉर्म 26-ए में उम्मीदवार को अपने परिवार के आश्रितों की जानकारी देनी होती है. नाथवाणी जी के एफिडेविट में 5 के बजाय सिर्फ 2 कॉलम थे, बाकी गायब कर दिए गए. इसके अलावा संपत्ति (एसेट्स) की जानकारी भी अधूरी है. उन्होंने अपनी और पत्नी की संपत्ति बताई, लेकिन एचयूएफ (हिंदू अविभाजित परिवार) की जानकारी छिपा ली. उन्होनें कहा कि 8 जून को दोपहर 3 बजे नामांकन बंद होने के बाद एफिडेविट अपलोड किए जाते हैं ताकि जनता देख सके. तकनीकी गलतियों को नामांकन खत्म होने और स्क्रूटनी शुरू होने से पहले सुधारा जा सकता है, लेकिन स्क्रूटनी के दौरान नया दस्तावेज स्वीकार नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, स्क्रूटनी में गलती पाए जाने पर नामांकन सीधे रद्द होना चाहिए. उन्होनें कहा कि आज सुबह 11:30 बजे कार्यवाही स्थगित कर स्क्रूटनी में जानबूझकर देरी की गई. रिटर्निंग ऑफिसर ने कानून के खिलाफ जाकर नाथवाणी की मदद की और उनका नया एफिडेविट स्वीकार किया. नए दस्तावेज लेना पूरी तरह अवैध है और इस आधार पर नामांकन तुरंत रद्द होना चाहिए