




रामगढ़
सरकारी अधिवक्ता (गवर्नमेंट प्लीडर) सिविल कोर्ट, रामगढ़ श्री संजीव कुमार अम्बष्ठ ने झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रधान सचिव को एक पत्र भेजकर राज्य के कई निजी अस्पतालों में कथित अनियमितताओं, मनमानी वसूली, मरीजों के उत्पीड़न तथा गैर-पारदर्शी बिलिंग की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मरीजों और उनके परिजनों की ओर से लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं कि कुछ निजी अस्पतालों में इलाज, दवाइयों, जांचों तथा आईसीयू सेवाओं के नाम पर अत्यधिक शुल्क वसूला जा रहा है। कई मामलों में मरीजों के परिजनों ने बिलों में पारदर्शिता नहीं होने और आर्थिक शोषण का आरोप लगाया है।
हाल के दिनों में सैमफोर्ड अस्पताल, रांची को लेकर भी सार्वजनिक स्तर पर गंभीर विवाद सामने आए हैं। विभिन्न शिकायतों और मीडिया में आई खबरों के अनुसार अस्पताल की बिलिंग व्यवस्था, महंगे इलाज और मरीजों के परिजनों के साथ हुए विवादों को लेकर लोगों में असंतोष देखा गया है। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है ताकि सच्चाई सामने आ सके और जनता का विश्वास बना रहे।
श्री अम्बष्ठ ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान और उसके बाद भी कई निजी अस्पतालों के विरुद्ध अनैतिक कार्यप्रणाली संबंधी आरोप और चर्चाएं सामने आती रही हैं। यदि कहीं भी मरीजों का आर्थिक शोषण, दबाव बनाकर वसूली, डिस्चार्ज में अनावश्यक बाधा या अन्य किसी प्रकार की अवैध गतिविधि हो रही है तो उस पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि—
पूरे झारखंड के निजी अस्पतालों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
अस्पतालों की बिलिंग व्यवस्था और शिकायत रजिस्टर का विशेष ऑडिट कराया जाए।
मरीजों के अधिकारों और चिकित्सा नैतिकता का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
दोषी पाए जाने वाले अस्पतालों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
मरीजों की शिकायतों के लिए राज्य स्तरीय हेल्पलाइन और निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।
श्री अम्बष्ठ ने कहा कि बीमारी और आपातकाल की स्थिति में आम जनता पहले से ही मानसिक और आर्थिक संकट में रहती है। ऐसे समय में यदि किसी अस्पताल द्वारा अनुचित वसूली या मरीजों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। सरकार को इस दिशा में तत्काल कदम उठाकर जनता का विश्वास मजबूत करना चाहिए।



