




गिद्दी। अरगड्डा प्रक्षेत्र के सिरका परियोजना खुली खदान में 70 घंटो के बाद भी जमा पानी निकाला नही जा सका है। उल्टे पानी का बढ़ ही रहा है। लिहाजा स्थिति बदतर होते जा रही है।चाणक का समरसेबल विगत एक वर्ष से खराब पड़ा है। दूसरे जगह से 48 घंटे के बाद कोयला निकाला जा रहा है। उत्पादन बढ़ाने की भी कोशिश की जा रही है।संकीर्ण सड़क का चौड़ी करण का काम भी चल रहा है। कोयला उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है।हालांकि प्रबंधन के द्वारा दूसरा फेस खोलकर बीते 48 घंटे के बाद 1200 एमटी कोयला का उत्पादन करने की बात कही जा रही है। लेकिन अभी भी कोयला फेस का बड़ा हिस्सा जलमग्न है। सिरका परियोजना में कृष्णा इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी एक ओर ओबी हटाने और दूसरी ओर कंपनी स्लरी हटाकर कोयला उत्पादन की कोशिश कर रहा है।खदान के पूर्वी उत्तरी क्षेत्र में ब्लास्टिंग कर कोयले के फेस तक पूरी तरह पहुंचने की कोशिश की जा रही है। लेकिन चर्चा यह है की खुली खदान के करीब पुराना चाणक के समीप गहरे कुंआ में पानी निकालने के लिए समरसेबल करीब एक वर्ष से खराब था।संभावना यह भी जताया जा रहा है कि इसके खराब रहने के कारण खुली खदान के अंदर अंडरग्राउंड माइन्स का पानी अधिक आ गया। अंडरग्राउंड माइन्स का पानी चाणक के कुएं से बाहर निकालने का काम समरसेबल मशीन के द्वारा किया जाता था। घटना के बाद से ही अभी तक का समरसेबल मशीन तो आ गया है। लेकिन इसे बैठने का काम नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण पानी लगातार वर्षा के बाद दो से ढाई मीटर खुली खदान कोयला फेस में बढ़ गया है। चर्चा है कि यदि रुक-रुक कर वर्षा रही तो कोयला खदान में पानी और बढ़ेगा।वहीं प्रबंधन सुरक्षा व्यवस्था और कारगर कदम उठाने के लिए फिलहाल शिथिल दिखाई पड़ रहा है। बहरहाल प्रबंधन की लापरवाही साफतौर पर देखी जा रही है।



