




अंकुश यादव/रांची : झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन (जेएससीए) स्टेडियम में 23 जून को आयोजित झारखंड टी-20 लीग के फाइनल मुकाबले के दौरान भारी अव्यवस्था देखने को मिली। मैदान के अंदर जहां दर्शक चौके-छक्कों का आनंद ले रहे थे, वहीं स्टेडियम के बाहर प्रवेश द्वारों पर अफरातफरी, धक्का-मुक्की और भगदड़ जैसी स्थिति बनी रही थी। इस घटना में कई लोगों के घायल होने की सूचना है। हालांकि बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस पूरे मामले ने आयोजन समिति और प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार फाइनल मुकाबले के दिन स्टेडियम के बाहर दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। बड़ी संख्या में लोग मैच देखने पहुंचे थे, लेकिन प्रवेश व्यवस्था भीड़ के अनुपात में पर्याप्त नहीं थी। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ती गई, प्रवेश द्वारों पर दबाव भी बढ़ता गया। स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब कुछ लोगों ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की। कई दर्शक गेट फांदकर स्टेडियम में प्रवेश करने का प्रयास करते नजर आए। इसके बाद धक्का-मुक्की और अफरातफरी का माहौल बन गया।
बताया जा रहा है कि फाइनल मुकाबले में भारी भीड़ जुटने के पीछे दो प्रमुख कारण थे। पहला, मैच के लिए दर्शकों की एंट्री निशुल्क रखी गई थी। दूसरा, सोशल मीडिया और लोगों के बीच यह चर्चा तेजी से फैल गई थी कि भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी फाइनल मुकाबला देखने स्टेडियम पहुंच सकते हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं थी, लेकिन अफवाहों ने लोगों की उत्सुकता को बढ़ा दिया और बड़ी संख्या में दर्शक स्टेडियम पहुंच गए।
गौरतलब है कि 10 जून से शुरू हुई जेपीएल टी-20 लीग के शुरुआती मुकाबलों में दर्शकों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही थी। फाइनल से पहले तक किसी भी मैच में इतनी बड़ी भीड़ देखने को नहीं मिली थी। माना जा रहा है कि इसी वजह से आयोजन समिति और प्रशासन ने फाइनल मुकाबले के लिए भीड़ का सही अनुमान नहीं लगाया। नतीजतन सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्थाएं अपर्याप्त साबित हुईं।
घटना के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। यदि दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ रही थी तो अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती समय रहते क्यों नहीं की गई? भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त बैरिकेडिंग और प्रवेश प्रबंधन की व्यवस्था पहले से क्यों नहीं की गई? ओवरक्राउडिंग की स्थिति बनने के बावजूद तत्काल प्रभाव से वैकल्पिक व्यवस्थाएं क्यों नहीं लागू की गईं? ऐसे कई सवाल हैं जिनका जवाब अब आयोजन समिति और प्रशासन को देना होगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जेएससीए स्टेडियम के उपाध्यक्ष संजय पांडे ने स्वीकार किया कि आयोजन में चूक हुई है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार की स्थिति फाइनल मुकाबले के दौरान बनी, उससे सीख लेने की जरूरत है। उन्होंने घटना पर खेद व्यक्त करते हुए प्रभावित लोगों से माफी मांगी और आश्वासन दिया कि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए व्यापक और प्रभावी इंतजाम किए जाएंगे।
फिलहाल यह घटना खेल आयोजनों में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की तैयारियों पर एक बड़ा सवाल बनकर सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े आयोजन में दर्शकों की संभावित संख्या का सही आकलन, पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और प्रभावी भीड़ नियंत्रण योजना बेहद जरूरी होती है। झारखंड टी-20 फाइनल के दौरान हुई अव्यवस्था ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।



