





RANCHI: राज्य सरकार ने रिम्स के निदेशक डॉ राजकुमार का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। उनकी जगह पर रिम्स में सर्जरी विभाग के प्राध्यापक डॉ दीपेन्द्र कुमार सिंह को नया निदेशक बनाया गया है। इस बाबत स्वास्थ्य विभाग के द्वारा अधिसूचना जारी कर दी गई है। गौरतलब है कि गुरुवार को ही यह खबर आई थी कि रिम्स के निदेशक डॉ राजनकुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। लेकिन उस समय इसकी आधिकारिक सूचना जारी नहीं हुई थी।
गौरतलब है कि झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में एडमिशन और टेंडर में गड़बड़ियों की शिकायतों की जांच के लिए सीआईडी ने बुधवार को छापेमारी की थी. सीआईडी की दो टीमों ने रिम्स के डेटा सेंटर, डीन ऑफिस व प्रशासनिक विभाग में कागजातों की जांच की थी. रिम्स निदेशक, डीन, चिकित्सा अधीक्षक और कर्मचारियों से पूछताछ की थी. यह कार्रवाई देर शाम तक चली. इस दौरान सीआईडी ने दोनों मामलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और फाइलें जब्त कीं.
दो मामलों की जांच
इनमें एक मामला वर्ष 2025 के शैक्षणिक सत्र में रिम्स में एमबीबीएस पाठ्यक्रम में कुछ ऐसे छात्रों के एडमिशन का है, जिनके जाति व दिव्यांगता प्रमाण पत्र फर्जी होने की शिकायत मिली थी. वहीं दूसरी शिकायत सफाई टेंडर से जुड़ी हुई है. आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर चहेती कंपनियों को सफाई का ठेका दिया गया. इन दोनों मामलों में शिकायतों की पुष्टि हुई तो सीआईडी थाने में एफआईआर दर्ज की जाएगी. संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होगी.
फर्जी प्रमाण पत्र का मामला
वर्ष 2025 में एमबीबीएस में फर्जी सर्टिफिकेट पर एडमिशन होने की शिकायत सीआईडी को मिली थी. शिकायत के अनुसार, 2025 के शैक्षणिक सत्र में एमबीबीएस के तीन और बीडीएस के एक छात्र का फर्जी जाति व दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर एडमिशन हुआ. इनमें काजल कुमारी, आशीष कुमार और ओली विश्वकर्मा के जाति प्रमाण पत्र पर संदेह है, जबकि पप्पू कुमार के दिव्यांगता प्रमाण पत्र के फर्जी होने का आरोप है.
सत्यापन पर सवाल
सीआईडी ने इन छात्रों के प्रमाण पत्रों की जांच की और जरूरी दस्तावेज जब्त किए. सीआईडी इस बात की जांच कर रही है कि बिना प्रमाण पत्रों की जांच के एडमिशन कैसे हुआ और छात्रों ने प्रथम वर्ष का पाठ्यक्रम भी लगभग पूरा कर लिया. जबकि नियम के अनुसार एडमिशन के बाद निश्चित समय-सीमा में चयनित छात्रों के मूल प्रमाण पत्रों का संबंधित जिला प्रशासन या जारी करने वाले प्राधिकरण से भौतिक सत्यापन कराना अनिवार्य है. रिम्स प्रबंधन ने एक साल बाद भी इनका सत्यापन क्यों नहीं कराया, इसकी भी जांच की जा रही है.




