





RANCHI: रिम्स निदेशक डॉ राजकुमार के इस्तीफे के बाद झारखंड की राजनीति में आरोप- प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। प्रमुख विपक्षी दल भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टी जदयू ने डॉ राजकुमार के इस्तीफे के बाद सरकार पर हमला बोल दिया है। भाजपा नें जहां इस मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी को दोषी करार देते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर दी है वहीं जदयू विधायक सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर डॉ राजकुमार के पत्र की जांच कराने की मांग कर दी है। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि इस्तीफा डॉ. राजकुमार का व्यक्तिगत निर्णय था। डॉ. राजकुमार का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब रिम्स में कथित एमबीबीएस प्रवेश अनियमितताओं और सैनिटेशन टेंडर आवंटन को लेकर सीआईडी जांच चल रही है। जांच के दौरान सीआईडी ने रिम्स में दस्तावेज जब्त किए और कई अधिकारियों से पूछताछ भी की। इस्तीफे के बाद सरकार ने डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा को कार्यवाहक निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी है।
गौरतलब है कि सीआईडी ने हाल ही में रिम्स में दो अलग-अलग मामलों की जांच शुरू की है। पहला मामला वर्ष 2025 के एमबीबीएस और बीडीएस दाखिलों में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश से जुड़ा है। दूसरा मामला सैनिटेशन सेवाओं के टेंडर में कथित अनियमितताओं का है। जांच के दौरान सीआईडी अधिकारियों ने रिम्स प्रशासन से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की। इन्हीं घटनाक्रमों के बीच डॉ. राजकुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद पूरे मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया।
बीजेपी का हमला- इस्तीफा स्वास्थ्य मंत्री को देना चाहिए था
बीजेपी प्रवक्ता रमाकांत महतो ने कहा कि इस्तीफा रिम्स निदेशक का नहीं बल्कि स्वास्थ्य मंत्री का होना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा लगातार रिम्स निदेशक पर दबाव बनाया जा रहा था और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था। बीजेपी का दावा है कि सीआईडी जांच केवल एक औपचारिक कारण था, जबकि वास्तविकता यह है कि विभागीय दबाव और सरकार के रवैये से परेशान होकर डॉ. राजकुमार ने पद छोड़ने का फैसला लिया। रविनाथ किशोर ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता चाहती थी तो पहले स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा करनी चाहिए थी।
डॉ. राजकुमार के पत्र की जांच कराएं सीएमः सरयू राय
जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि वो रिम्स के निदेशक रहे डॉ. राजकुमार द्वारा स्वास्थ्य मंत्री को 8 जून को लिखे गए पत्र की जांच कराएं। यहां जारी बयान में सरयू राय ने कहा कि डॉ. राजकुमार से सीआईडी ने लगातार 8 घंटे तक पूछताछ की। इसी से आहत होकर डॉ. राजकुमार ने त्यागपत्र दिया। इसके पूर्व उन्होंने 8 जून को एक पत्र स्वास्थ्य मंत्री को भेजा था। इस पत्र में उन्होंने 22 बिंदुओं के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव द्वारा शासी परिषद को अंधेर में रख कर उन पर दुर्भावनाग्रस्त होकर कार्रवाई करने तथा लगातार उन्हें परेशान किये जाने की बात भी कही है। सरयू राय ने कहा कि रिम्स निदेशक के इस पत्र में रिम्स के शासी निकाय के उपर तथा खुद डॉ राजकुमार के ऊपर कई मामलों में दबाव डाला गया। न्यायपालिका का आदेश होते हुए भी उन पर कार्रवाई करने की कोशिश की गई। उन्हें झूठे मामले में प्रताड़ित करने का प्रयास किया गया। यह पत्र रिम्स और स्वास्थ्य विभाग की अनियमित कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालता है।
सरयू राय ने कहा कि डॉ. राजकुमार अनुसूचित वर्ग से आते हैं। इसके पूर्व इन्होंने इसी स्तर की अनेक जिम्मेदारियों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया। उन्हें कई मौकों पर प्रशंसित-सम्मानित भी किया गया।
श्री राय ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि रिम्स में अब तक जितने भी अच्छे डायरेक्टर आए, किसी न किसी कारण से उन्हें बीच में ही रिम्स छोड़ना पड़ा। डॉ. राजकुमार न्यूरोलॉजी के योग्य चिकित्सक हैं। रिम्स में भी उन्होंने न्यूरो के कई गंभीर ऑपरेशन्स को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। ऐसी परिस्थिति में लगता है कि रिम्स के संचालन में सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा अनावश्यक दबाव डाला जा रहा है।
सरयू राय के अनुसार, अपने पत्र में डॉ. राजकुमार ने लिखा कि 16 अप्रैल 2025 को आयोजित शासी परिषद की 59वीं बैठक में विगत बैठक के ‘कुछ अवैध भुगतान’ नहीं करने के कारण उन पर दबाव बनाया गया और धमकाया भी गया। श्री राय ने कहा कि ऐसी स्थिति रहेगी तो कोई भी योग्य से योग्य चिकित्सक रिम्स निदेशक के पद पर आकर रिम्स की कार्य संस्कृति को सुधार नहीं सकता है। स्पष्ट है कि रिम्स के कार्यो में सरकारी हस्तक्षेप सबसे बड़ा कारण है, जिससे रिम्स में अव्यवस्था फैल रही है।
झामुमो का जवाब- यह पूरी तरह व्यक्तिगत फैसला
बीजेपी के आरोपों पर पलटवार करते हुए झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि डॉ. राजकुमार का इस्तीफा उनका निजी निर्णय है। उन्होंने साफ किया कि सरकार ने किसी भी स्तर पर उन पर इस्तीफा देने का दबाव नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्था या अधिकारी के खिलाफ शिकायत आती है तो उसकी जांच होना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।मनोज पांडे ने कहा कि यदि डॉ. राजकुमार को लगता था कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है तो उन्हें जांच का सामना करना चाहिए था। जांच पूरी होने के बाद ही किसी प्रकार की कार्रवाई होती।
कांग्रेस ने कहा- सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करती है
प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रभारी राकेश सिन्हा ने भी बीजेपी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि महागठबंधन सरकार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कराना सरकार का दायित्व है। यदि जांच के दौरान कोई अधिकारी स्वयं इस्तीफा देता है तो इसे सरकार की प्रताड़ना नहीं कहा जा सकता। कांग्रेस का कहना है कि कानून के अनुसार जांच आगे बढ़ रही है और दोषी पाए जाने पर ही किसी के खिलाफ कार्रवाई होगी।




