

30 जून को संताल हूल आंदोलन के 171वें हूल दिवस के अवसर पर झारखंड के साहिबगंज जिले के भोगनाडीह, बरहेट में कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस बार यह आयोजन पूरी सादगी और शांति के साथ होगा। जिला प्रशासन ने किसी भी बड़े, राजनीतिक या भव्य सार्वजनिक कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी है।
प्रशासन की ओर से शहीदों के सम्मान में विभिन्न स्थानों पर बैनर और पोस्टर लगाए गए हैं। कार्यक्रम के दौरान हूल आंदोलन के महानायक सिद्धो, कान्हू, चांद, भैरव तथा वीरांगना फूलो और झानो सहित सभी वीर शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक संगठन और स्थानीय ग्रामीण भी श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे।
जानकारी के अनुसार, शहीद सिद्धो-कान्हू के प्रत्यक्ष वंशज मंडल मुर्मू ने इस वर्ष भी पारंपरिक रूप से बड़े आयोजन की अनुमति मांगी थी, लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए जिला प्रशासन ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। प्रशासन और आयोजकों की सहमति से कार्यक्रम को पारंपरिक और सादगीपूर्ण तरीके से आयोजित किया जा रहा है।
दरअसल, पिछले वर्ष हूल दिवस के दौरान भोगनाडीह में हिंसक घटना हुई थी। उपद्रवियों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर लाठियों और तीरों से हमला कर दिया था, जिससे कानून-व्यवस्था की गंभीर स्थिति पैदा हो गई थी। इसी घटना से सबक लेते हुए इस बार प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। भोगनाडीह और बरहेट में बड़ी संख्या में पुलिस बल और मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। साथ ही ड्रोन कैमरों और खुफिया तंत्र के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है।
मुख्य कार्यक्रम के अलावा बाबुपुर स्थित उस ऐतिहासिक स्थल पर भी सादगी के साथ माल्यार्पण किया जाएगा, जहां अंग्रेजी शासन ने सिद्धो और कान्हू को फांसी दी थी। वर्ष 1855 में भोगनाडीह से शुरू हुआ संताल हूल आंदोलन अंग्रेजी शासन और महाजनी व्यवस्था के खिलाफ आदिवासी समाज के संघर्ष का प्रतीक माना जाता है और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण जनआंदोलनों में इसकी विशेष पहचान है।
फिलहाल, प्रशासन ने सभी लोगों से अपील की है कि वे शांतिपूर्ण, गरिमामयी और अनुशासित तरीके से हूल दिवस मनाते हुए वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करें।
