

रांची: राजधानी रांची में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया किरायेदार सत्यापन अभियान अब जमीनी स्तर पर धीमा पड़ता नजर आ रहा है। मिडटाइम की पड़ताल में सामने आया है कि शहर के कई इलाकों में अधिकांश मकान मालिकों ने अब तक अपने किरायेदारों का विवरण संबंधित थानों में जमा नहीं कराया है। इससे पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।
जांच के दौरान कई मकान मालिकों ने स्वीकार किया कि उन्होंने न तो किरायेदार का पुलिस सत्यापन कराया है और न ही उसके पहचान संबंधी दस्तावेज संबंधित थाने में जमा किए हैं। वहीं जब इस संबंध में पुलिस अधिकारियों और कर्मियों से जानकारी ली गई तो यह स्पष्ट हुआ कि किरायेदार सत्यापन की प्रक्रिया फिलहाल नियमित रूप से संचालित नहीं हो रही है। अभियान की निगरानी और अनुपालन भी पहले की तुलना में काफी कमजोर दिखाई दे रहा है।
दरअसल, वर्ष 2024 में रांची से छह संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस प्रशासन ने पूरे शहर में विशेष किरायेदार सत्यापन अभियान शुरू किया था। इसके तहत सभी थाना प्रभारियों को बीट पेट्रोलिंग मजबूत करने, मोहल्लावार किरायेदारों का डाटाबेस तैयार करने और किराये के मकानों में रहने वाले लोगों का पूरा रिकॉर्ड थानों में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए थे। अभियान की निगरानी की जिम्मेदारी डीएसपी स्तर के अधिकारियों को सौंपी गई थी।
पुलिस ने उस समय मकान मालिकों को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया था कि बिना पुलिस सत्यापन किसी भी व्यक्ति को किराये पर मकान न दें। साथ ही यह भी चेतावनी दी गई थी कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 223 के अनुसार यदि कोई मकान मालिक किरायेदार की जानकारी संबंधित थाने में जमा नहीं करता है, तो उसे छह माह तक की सजा, 2,500 रुपये तक का जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं।
यह पहली बार नहीं है जब ऐसा अभियान शुरू किया गया हो। इससे पहले सिठियो से संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी और हिंदपीढ़ी के एक लॉज से विस्फोटक सामग्री मिलने के बाद भी पुलिस ने किरायेदारों और लॉज में ठहरने वाले लोगों के सत्यापन के लिए विशेष अभियान चलाया था। लेकिन पिछले अभियानों की तरह इस बार भी शुरुआती सख्ती के बाद अभियान की रफ्तार धीमी पड़ गई।
मौजूदा स्थिति यह संकेत देती है कि सुरक्षा से जुड़े इस महत्वपूर्ण अभियान को प्रभावी बनाने के लिए नियमित निगरानी, सख्त अनुपालन और आम लोगों की भागीदारी बेहद आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर किरायेदार सत्यापन न केवल अपराध नियंत्रण में मदद करता है, बल्कि शहर की समग्र सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत बनाता है।
