भाषा संरक्षण को लेकर बड़ी पहल के बीच राजनीतिक विवादों पर बंधु तिर्की का खुला हमलाBy Admin Thu, 02 July 2026 05:08 PM

रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस नेता बंधु तिर्की ने एक साथ कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने झारखंड की जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण, परिसीमन विवाद, सरकारी आवास, राज्यसभा चुनाव में पार्टी की हार और संगठन के भीतर चल रहे मतभेदों पर बेबाक टिप्पणी की।

बंधु तिर्की ने कहा कि झारखंड की नौ मान्यता प्राप्त जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण के लिए जिस गंभीरता से काम होना चाहिए, वह नहीं हो रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि नई पीढ़ी अपनी मातृभाषाएं भूलती जा रही है और कई भाषाएं धीरे-धीरे संकट में हैं। इसी को देखते हुए 4 जुलाई को दीक्षांत मंडप में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं पर राज्य स्तरीय कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य गठन के बाद पहली बार नौ मान्यता प्राप्त भाषाओं को लेकर इतना बड़ा आयोजन हो रहा है, जिसे उन्होंने "मील का पत्थर" बताया।

परिसीमन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि जब यूपीए सरकार के समय यह प्रक्रिया शुरू हुई थी, तब भी झारखंड के हितों को देखते हुए विरोध किया गया था। उनका कहना था कि इस बार भी राज्य के सामाजिक और जनजातीय हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और इस विषय पर गंभीरता से विचार जरूरी है।

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सरकारी आवास को लेकर पूछे गए सवाल पर बंधु तिर्की ने कहा कि राज्य समन्वय समिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन जब तक सरकार की ओर से नई अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक आवास खाली करने का सवाल नहीं उठता। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिसूचना जारी होते ही वह सरकारी आवास छोड़ देंगे और इसे अनावश्यक विवाद नहीं बनाया जाना चाहिए।

राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की हार पर उन्होंने स्वीकार किया कि इसकी समीक्षा होना जरूरी है। तिर्की ने कहा कि अगर गठबंधन में रहकर किसी ने गलत संकेत दिए हैं या पार्टी के प्रति ईमानदारी नहीं दिखाई है, तो ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, "ऐसी दोस्ती से अच्छा तो दुश्मन है।" साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के भीतर हर कोई जानता है कि गलती कहां हुई है और समीक्षा के दौरान जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

भाषा विवाद को लेकर कांग्रेस के भीतर उठे मतभेदों पर भी उन्होंने अपनी ही पार्टी के नेताओं को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं को इस विषय की पूरी जानकारी नहीं है। बंधु तिर्की ने चेतावनी दी कि झारखंड की नौ जनजातीय भाषाओं के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जनता ऐसे लोगों को राजनीतिक रूप से करारा जवाब देगी।