

Ranchi: वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने अपने सुरक्षा कर्मियों और कारकेट को क्या वापस किया कि सबसे ज्यादा खलबली काँग्रेस पार्टी में ही शुरू हो गई है। वित्त मंत्री के इस कदम पर सबसे पहले राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का बयान सामने आया है। इरफ़ान अंसारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर असंतोष जताते हुए कहा कि वित्त मंत्री एक अनुभवी और वरिष्ठ नेता हैं उन्हें इस संवेदनशील मामले को मीडिया के बजाय मुख्यमंत्री के समक्ष उठाना चाहिए था. उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री हमारे राज्य के बेहद अनुभवी नेता हैं. उन्हें इस तरह के सुरक्षा से जुड़े गंभीर विषय पर सीधे डीजीपी को चिट्ठी लिखने या मीडिया में चीजों को सार्वजनिक करने के बजाय मुख्यमंत्री से मिलकर बात करनी चाहिए थी. उन्होनें कहा कि अभी हाल ही में कैबिनेट की बैठक हुई थी जिसमें राज्य के सभी वरिष्ठ मंत्री और मुख्यमंत्री मौजूद थे. अगर वित्त मंत्री को अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई आपत्ति या शिकायत थी तो वह कैबिनेट की बैठक में इस पर खुलकर चर्चा कर सकते थे. इस तरह के आंतरिक मामलों को इस रूप में सार्वजनिक करना सरकार की छवि के लिए ठीक नहीं है.हालांकि स्वास्थ्य मंत्री ने वित्त मंत्री की सुरक्षा की संवेदनशीलता को भी पूरी तरह स्वीकार किया.
नक्सल प्रभावित इलाके से आते है वित्त मंत्री
उन्होंने कहा कि यह भी एक बड़ा सच है कि वित्त मंत्री जिस क्षेत्र से आते हैं वह धुर नक्सल प्रभावित इलाका है. लिहाजा उनकी सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता और न ही उनकी सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक होनी चाहिए.बता दें कि झारखंड के वित्त मंत्री ने हाल ही में अपनी सुरक्षा में तैनात कर्मियों को वापस भेज दिया था और इस संबंध में डीजीपी को पत्र लिखकर नाराजगी जताई थी. इसके बाद से ही राज्य के राजनीतिक गलियारों में अलग अलग तरह की चर्चाएं हैं.
