

रांची प्रेस क्लब में शुक्रवार को विभिन्न आदिवासी संगठनों और आदिवासी समाज से जुड़े राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित कर प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताएं और मांगें सार्वजनिक रूप से रखीं। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध परिसीमन की प्रक्रिया से नहीं है, बल्कि यदि इसके माध्यम से अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित विधानसभा और लोकसभा सीटों की संख्या कम करने का प्रयास किया गया, तो इसका पूरे राज्य में लोकतांत्रिक तरीके से कड़ा विरोध किया जाएगा।
प्रेस वार्ता की अध्यक्षता पूर्व मेयर रमा खलखो ने की। इस अवसर पर शशि पन्ना, अजय तिर्की, ग्लैडसन डुंगडुंग, लक्ष्मी नारायण मुंडा सहित विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि एवं सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि परिसीमन के दौरान जनसंख्या के आधार पर एसटी आरक्षित सीटों में कमी की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर प्रतिनिधित्व तय किया जाता है, तो उससे पहले पिछले 75 वर्षों में आदिवासी समाज के साथ हुए संवैधानिक और राजनीतिक अन्याय की समीक्षा की जानी चाहिए तथा उसकी भरपाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज का राजनीतिक प्रतिनिधित्व किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं होना चाहिए और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की मौजूदा संख्या में किसी प्रकार की कटौती स्वीकार नहीं की जाएगी। वक्ताओं का कहना था कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की रक्षा करना सरकार और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है।
इस दौरान संगठनों ने आगामी 30 अगस्त को अनुसूचित क्षेत्रों में एक विशाल रैली आयोजित करने की घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि यह रैली केवल एसटी आरक्षित सीटों के मुद्दे तक सीमित नहीं होगी, बल्कि आदिवासी समाज की जल, जंगल, जमीन, संस्कृति, पहचान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के व्यापक उद्देश्य के साथ आयोजित की जाएगी।
प्रेस वार्ता में मौजूद प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि परिसीमन की प्रक्रिया का उपयोग आदिवासी राजनीतिक प्रतिनिधित्व को कमजोर करने के लिए किया गया, तो राज्यभर में लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने सरकार और परिसीमन आयोग से आदिवासी समाज की संवैधानिक सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी को यथावत बनाए रखने की मांग की।
