हेमंत कैबिनेट के 3 मंत्रियों ने जताई आपत्ति : वित्त विभाग में लटक रही है फाइल, कैसे दौड़ेगी विकास की गाड़ी ? By Admin Sat, 04 July 2026 12:54 PM

RANCHI : झारखंड सरकार में मंत्रियों के बीच समन्वय के अभाव का नमूना गुरुवार को सम्पन्न कैबिनेट की बैठक में साफ तौर पर सामने आया। कैबिनेट की बैठक के दौरान ही नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने वित्त विभाग के कार्यकलापों पर मुख्यमंत्री के समक्ष आपती दर्ज कराई। मंत्रियों का कहना था कि वित्त विभाग में लंबे अंतराल तक फ़ाइलों को लटकाकर रखा जाता है जिसके कारण समय पर विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने में परेशानी हो रही है। अधिकारी जानबूझ कर फाइल लटका कर रखते हैं और अनावश्यक जानकारी मांगते हैं. मंत्रियों का कहना था कि वित्तीय अनुशासन सही है, लेकिन फाइल रोकना सही नहीं है. समय पर पैसे नहीं मिलने से काम प्रभावित हो रहा है.
रिम्स टू के निर्माण पर वित्त विभाग ने पूछा, मानव संसाधन की कार्ययोजना बताएं
रिम्स टू निर्माण के लिए कैबिनेट ने 4000 करोड़ से अधिक की राशि मंजूर की है. यह फाइल वित्त विभाग के पास पहुंची थी, तो विभाग ने स्वास्थ्य विभाग से पूछा कि इतने बड़े अस्पताल के लिए मानव संसाधन को लेकर क्या कार्ययोजना है. इस अस्पताल में दर्जनों विभाग होंगे. इसके लिए बड़े मानव संसाधन की जरूरत होगी. स्वास्थ्य विभाग डॉक्टर, पारा मेडिकल और अन्य कर्मियों की जरूरत कैसे पूरा करेगा, यह बताए. इसके साथ ही रिम्स टू को लेकर आठ से नौ बिंदुओं पर जवाब मांगे गए थे. 

नगर विकास विभाग की परियोजनाओं पर असर
नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि उनके विभाग की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं वित्त विभाग में लंबित फाइलों के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। उन्होंने बताया कि आदित्यपुर, मानगो, जमशेदपुर, जुगसलाई और कपाली की सीवरेज एवं वेस्ट मैनेजमेंट परियोजनाएं, चास की सीवरेज योजना, दुमका, लोहरदगा, मधुपुर, मेदिनीनगर और सिमडेगा की लीगेसी वेस्ट मैनेजमेंट परियोजनाएं, 27 नगर निकायों की यूज्ड वाटर मैनेजमेंट योजना तथा सात नगर निकायों में पार्क निर्माण जैसी परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
रिम्स-2 को लेकर स्वास्थ्य मंत्री ने जताई नाराजगी
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कैबिनेट में रिम्स-2 परियोजना का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि कैबिनेट से 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी मिलने के बावजूद वित्त विभाग लगातार अतिरिक्त जानकारियां मांग रहा है, जिससे परियोजना की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। सूत्रों के अनुसार, वित्त विभाग ने स्वास्थ्य विभाग से पूछा है कि प्रस्तावित अस्पताल के संचालन के लिए डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य मानव संसाधनों की व्यवस्था कैसे की जाएगी। इसके अलावा परियोजना से जुड़े आठ से नौ अन्य बिंदुओं पर भी विस्तृत जानकारी मांगी गई है।
ग्रामीण विकास विभाग की योजनाएं भी प्रभावित
ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने भी बैठक में अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बजट स्वीकृति और राशि जारी होने में देरी के कारण विभाग की कई योजनाएं समय पर लागू नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने बताया कि अबुआ आवास योजना के लंबित आवासों का निर्माण, जल छाजन योजना, सड़क निर्माण परियोजनाएं तथा अंबेडकर आवास योजना जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाएं पर्याप्त राशि नहीं मिलने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने दी सफाई
पूरे मामले पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि हर फाइल उनके पास नहीं आती और अधिकांश मामलों का निपटारा अधिकारियों के स्तर पर ही किया जाता है। उन्होंने कहा कि जो फाइलें उनके पास आती हैं, उन्हें वे जल्द से जल्द निपटाने का प्रयास करते हैं और विभागीय मंत्रियों के साथ उनका लगातार संवाद बना रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारी वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए अतिरिक्त जानकारी मांगते होंगे, लेकिन किसी भी स्थिति में फाइलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और समय-सीमा का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
सरकार के भीतर बढ़ी हलचल
कैबिनेट बैठक में सामने आई मंत्रियों की नाराजगी के बाद सरकार के भीतर विभागों के बीच समन्वय और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। एक ओर मंत्री विकास योजनाओं में तेजी लाने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वित्त विभाग वित्तीय अनुशासन का हवाला दे रहा है। अब देखना होगा कि सरकार लंबित फाइलों और अटकी परियोजनाओं को लेकर क्या ठोस कदम उठाती है और मंत्रियों की शिकायतों का समाधान कैसे करती है।

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