

New Delhi/Ranchi: झारखंड सिर्फ खनिजों का प्रदेश नहीं है बल्कि झारखंड प्राकृतिक सौन्दर्य, धार्मिक आस्था और एडवेंचर टूरिज्म का भी प्रदेश है। राज्य की हेमंत सरकार ने इस अनूठे संगम वाले झारखंड को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. नई दिल्ली के होटल ताज पैलेस में आयोजित दो दिवसीय नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन में सरकार ने देश-विदेश के निवेशकों, उद्योगपतियों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के सामने झारखंड की पर्यटन संभावनाओं को विस्तार से रखा और राज्य में निवेश का आह्वान किया.
बैठक में पर्यटन विभाग ने स्पष्ट किया कि झारखंड केवल खनिज संपदा का राज्य नहीं, बल्कि प्राकृतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध ऐसा पर्यटन स्थल है, जहां पर्यटकों को एक ही राज्य में झरने, पहाड़, नदियां, बांध, जंगल, टाइगर रिजर्व और ऐतिहासिक धरोहरों का अनूठा अनुभव मिल सकता है. सरकार का लक्ष्य पर्यटन क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर राज्य को देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करना है.
पर्यटन विभाग के सचिव मुकेश कुमार ने कहा कि झारखंड उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है, जो भीड़भाड़ से दूर प्रकृति के बीच सुकून की तलाश करते हैं. उन्होंने कहा कि यहां पर्यटकों को एक ही यात्रा में प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक पर्यटन और रोमांचक अनुभव का अद्भुत मेल देखने को मिलता है. उन्होंने बताया कि स्टेकहोल्डर्स से मिले सुझावों के आधार पर अगले सात दिनों के भीतर नई पर्यटन नीति का मसौदा तैयार कर लिया जाएगा.
झारखंड के धार्मिक पर्यटन की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है, जहां हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं. देवघर के आसपास स्थित मसानजोर डैम, त्रिकूट पर्वत और ऐतिहासिक मलूटी मंदिर परिसर पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है.
राज्य सरकार ने एडवेंचर और अनुभव आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए देश में पहली बार सीसीएल (CCL) के सहयोग से माइनिंग टूरिज्म की शुरुआत भी की है. इसके तहत पर्यटक बड़कागांव क्षेत्र में आधुनिक खनन गतिविधियों को करीब से देख और समझ सकेंगे. यह पहल झारखंड की औद्योगिक पहचान को पर्यटन से जोड़ने का एक अनूठा प्रयास माना जा रहा है.
राजधानी रांची को भी पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में सरकार काम कर रही है. यहां स्थित पहाड़ी मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, वार्षिक रथ मेला, हुंडरू, दशम, जोन्हा और अन्य जलप्रपात पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. रांची से कुछ ही दूरी पर स्थित कई प्राकृतिक स्थल ऐसे हैं, जहां पर्यटक प्रकृति के बीच सुकून का अनुभव कर सकते हैं.
सरकार का मानना है कि झारखंड की पर्यटन क्षमता अभी पूरी तरह सामने नहीं आ सकी है. नई पर्यटन नीति के जरिए निवेश को प्रोत्साहन, आधुनिक पर्यटन अवसंरचना का विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और प्रभावी प्रचार-प्रसार पर विशेष जोर दिया जाएगा, ताकि झारखंड को देश और दुनिया के प्रमुख पर्यटन गंतव्यों में स्थापित किया जा सके.
