
रांची: राजधानी रांची में बारिश के बाद एक बार फिर जलजमाव की समस्या ने शहर की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश की कुछ घंटों की बौछार के बाद कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गईं। पुलिस लाइन समेत कई क्षेत्रों में हालात ऐसे हैं कि बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहा और लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। नालियों का गंदा पानी और सड़क पर फैली गंदगी ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। हर साल मानसून के दौरान शहर के कई हिस्सों में जलजमाव की स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। लोगों के मुताबिक बारिश के बाद सड़क पर बने गड्ढे पानी से भर जाते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। कई बार राहगीर इन गड्ढों में गिरकर घायल भी हो चुके हैं।
जमा पानी और गंदगी के कारण कई इलाकों में बदबू फैल गई है। लोगों को डर है कि लंबे समय तक पानी जमा रहने से डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण बनी हुई है।
हर साल मानसून से पहले नगर निगम की ओर से जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं। नालियों की सफाई, जलजमाव वाले इलाकों की पहचान और तैयारियों को लेकर योजनाएं बनाई जाती हैं, लेकिन बारिश के बाद जमीनी हकीकत कई बार अलग नजर आती है।
ऐसे में अब रांची की मेयर रौशनी खलखो के सामने शहर की जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने की बड़ी चुनौती है। राजधानी की जिम्मेदारी संभाल रहे नगर निगम से लोगों की उम्मीदें बढ़ी हुई हैं। लोगों का सवाल है कि जब हर साल बारिश के मौसम में यही समस्या सामने आती है, तो फिर इसका स्थायी समाधान क्यों नहीं निकल पा रहा है।
रौशनी खलखो की राजनीतिक सक्रियता लगातार चर्चा में रही है, लेकिन शहरवासी चाहते हैं कि राजधानी की बुनियादी समस्याओं पर भी उतना ही ध्यान दिया जाए। लोगों का कहना है कि रांची को सिर्फ बयान, निरीक्षण और बैठकों की जरूरत नहीं है, बल्कि ऐसे ठोस कदमों की जरूरत है जिनका असर सड़कों पर दिखाई दे।
बारिश के बाद जलजमाव अब सिर्फ पानी भरने की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह राजधानी की व्यवस्था की परीक्षा बन चुकी है। सवाल यही है कि क्या इस बार नगर निगम इस पुरानी समस्या का स्थायी समाधान निकाल पाएगा, या फिर हर साल की तरह रांची के लोग अगली बारिश में भी इसी परेशानी का सामना करते रहेंगे।
क्योंकि राजधानी सिर्फ दावों से नहीं चलती, उसे बेहतर व्यवस्था और जमीन पर दिखने वाले काम की जरूरत होती है।