भगवान जगन्नाथ का नेत्रदान महोत्सव सम्पन्न, कल निकलेगी भव्य रथ यात्राBy Admin Wed, 15 July 2026 06:59 PM

RANCHI : रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में 15 दिनों के एकांतवास के बाद भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का नेत्रदान अनुष्ठान पूर्ण हो गया है। 15 दिनों के एकांतवास के बाद भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा दर्शन मंडप में भक्तों को दर्शन दिया।  इस अवसर पर महाप्रभु का विशेष श्रृंगार किया गया।  उन्हें नए वस्त्र पहनाए गए,  नेत्रों का अलंकरण किया गया  तथा शंख और पद्म धारण कराए गए। इस दौरान भगवान जगन्नाथ की 108 दीपों से भव्य महाआरती की गई।  इसके बाद भगवान को मालपुआ, इलायची दाना, बादाम, आम, कटहल और अनानास सहित विशेष भोग अर्पित किया गया।  इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में भक्त  शामिल हुए। इसके बाद से ही मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने लगी है। वैदिक मंत्रोच्चार और शंखध्वनि के बीच, जब मंदिर के गर्भगृह के कपाट खुले, तो वातावरण में एक दिव्य ऊर्जा का संचार हो गया. 15 दिनों के अनवसर के बाद जब प्रभु की प्रतिमाओं में नेत्रदान की रस्म पूरी की गई, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो साक्षात जगत के नाथ अपनी करुणा भरी दृष्टि से अपने भक्तों को निहार रहे हों. मुख्य पुरोहित के सानिध्य में संपन्न हुए इस अनुष्ठान ने भक्तों की आंखों में श्रद्धा के आंसू ला दिए. नेत्रदान के बाद प्रभु की प्रथम झलक पाकर श्रद्धालु धन्य हो गए. मंदिर परिसर में 108 दीपों से की गई भव्य महाआरती ने अंधकार को मिटाकर प्रकाश के उस मार्ग को प्रशस्त किया, जो सीधे ईश्वर के चरणों तक जाता है. भगवान को समर्पित विशेष भोग—जिसमें मालपुआ, इलायची दाना, बादाम और ऋतुफल शामिल थे, इस बात का प्रतीक है कि प्रभु अपने भक्तों के प्रेम के भूखे हैं.

भगवान जगन्नाथ का भव्य रथ मेला और यात्रा 16 जुलाई से शुरू होगी।श्रद्धालु दोपहर 2 बजे तक भगवान के दर्शन कर सकेंगे, जिसके बाद भगवान रथ पर सवार होकर अपनी मौसीबाड़ी (गुंडिचा मंदिर) के लिए प्रस्थान करेंगे। रथ यात्रा के दौरान 501 दंपतियों द्वारा सामूहिक विष्णु सहस्त्रनाम पाठ का आयोजन भी किया जाएगा। यह ऐतिहासिक रथयात्रा और मेला 16 से 25 जुलाई तक चलेगा। 
दोपहर तक दर्शन, शाम को निकलेगी ऐतिहासिक रथयात्रा
गुरुवार को सुबह नियमित पूजा-अर्चना के बाद दोपहर 2 बजे तक श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकेंगे. इसके बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथ पर विराजमान होकर मौसीबाड़ी के लिए प्रस्थान करेंगे. शाम 5 बजे ऐतिहासिक रथयात्रा का शुभारंभ होगा. इस दौरान 501 दंपतियों द्वारा सामूहिक रूप से विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया जाएगा, जो आयोजन का विशेष आकर्षण रहेगा.
भव्य सजावट से जगमगाया मंदिर परिसर
रथयात्रा को लेकर पूरे मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी और सजावट से सुसज्जित किया गया है. रथयात्रा की तैयारी को लेकर मंदिर परिसर किसी दुल्हन की तरह सजा हुआ है. आकर्षक अलंकरण, रंग-बिरंगी पताकाएं और विद्युत सज्जा ने पूरे मंदिर को एक दिव्य लोक का स्वरूप दे दिया है. मंदिर के बाहर मेला क्षेत्र में भी रौनक अपने चरम पर है. पूजा सामग्री, खिलौने और पारंपरिक मिठाइयों की दुकानों पर भक्तों की भीड़ देखी जा सकती है.
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि लाखों की संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालु बिना किसी बाधा के प्रभु का दर्शन कर सकें. प्रशासन और मंदिर समिति ने मिलकर हर संभव प्रयास किया है कि सुदूर क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं को कोई कष्ट न हो. जगन्नाथपुर मंदिर के मुख्य पुरोहित के अनुसार, भगवान जगन्नाथ के दर्शन मात्र से ही जीवन के सारे संताप दूर हो जाते हैं. यह रथयात्रा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि धर्म और संस्कृति का वह सेतु है जो हमें हमारे मूल्यों से जोड़ता है.