BREAKING: CID की ताबड़तोड़ कार्रवाई, डिप्टी कंट्रोलर समेत पांच गिरफ्तार, जांच में सामने आ रहे नए तथ्यBy Admin Wed, 22 July 2026 07:40 PM

Exclusive/रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के परिणाम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राज्य के सबसे चर्चित भर्ती मामलों में बदल चुका है। परिणाम जारी होने के बाद अभ्यर्थियों द्वारा उठाए गए सवालों ने धीरे-धीरे एक बड़े जांच अभियान का रूप ले लिया है। अब इस मामले में सीआईडी की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। जेपीएससी कार्यालय, परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) के कार्यालय और संबंधित अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी के बाद जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर सीआईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी देवघर से, टीडीपीएल के डायरेक्टर रामवीर सिंह और अन्य दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।
पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब 20 जुलाई को जेपीएससी ने 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित किया। परिणाम सामने आते ही बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। कई अभ्यर्थियों ने कटऑफ, अंक निर्धारण, मूल्यांकन प्रक्रिया तथा परिणाम तैयार करने के तरीके को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं। सोशल मीडिया पर लगातार सवाल उठने लगे और देखते ही देखते मामला राज्यव्यापी चर्चा का विषय बन गया। विभिन्न छात्र संगठनों, अभ्यर्थियों और राजनीतिक दलों ने निष्पक्ष जांच की मांग शुरू कर दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने जांच की जिम्मेदारी अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को सौंप दी। इसके बाद सीआईडी की विशेष टीम ने रांची स्थित जेपीएससी कार्यालय में घंटों तक जांच अभियान चलाया। अधिकारियों के कक्ष, कंप्यूटर सिस्टम, सर्वर, डिजिटल रिकॉर्ड, परीक्षा संबंधी दस्तावेज और डेटा प्रोसेसिंग से जुड़े रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की गई। जांच एजेंसी ने कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी जब्त किया, जिनकी तकनीकी जांच की जा रही है।
इसके साथ ही परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) के कार्यालय पर भी छापेमारी की गई। जांच के दौरान एजेंसी के कई दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री को अपने कब्जे में लिया गया। अधिकारियों के अनुसार इन दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि परीक्षा संचालन और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में कहीं किसी प्रकार की अनियमितता हुई या नहीं।
सीआईडी की जांच केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रही। जांच एजेंसी ने डिजिटल डेटा, सर्वर लॉग, परीक्षा से संबंधित रिकॉर्ड, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, हार्ड डिस्क तथा सीसीटीवी फुटेज का भी गहन विश्लेषण किया। कई अधिकारियों और कर्मचारियों से लगातार पूछताछ की गई। जांच के दौरान मिले तकनीकी साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर सीआईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार किए गए लोगों में जेपीएससी की डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी, टीडीपीएल के डायरेक्टर रामवीर सिंह तथा दो अन्य आरोपी शामिल हैं। सभी आरोपियों से सीआईडी लगातार पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि परीक्षा संचालन, डेटा प्रोसेसिंग, परिणाम तैयार करने और अभ्यर्थियों के चयन से संबंधित प्रक्रिया में किस स्तर पर कथित अनियमितताएं हुईं और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
सूत्रों के अनुसार सीआईडी को जांच के दौरान कई ऐसे डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेज मिले हैं, जिनके आधार पर आगे और भी लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच एजेंसी बैंक खातों के लेनदेन, डिजिटल एंट्री, डेटा प्रोसेसिंग, परीक्षा प्रबंधन, सर्वर गतिविधियों और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी जांच कर रही है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच जेपीएससी के तत्कालीन चेयरमैन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद आयोग की कार्यप्रणाली और भर्ती प्रक्रिया को लेकर कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच पूरी नहीं होती, तब तक इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर बना संशय दूर नहीं होगा।

वहीं, जेपीएससी मांस की परीक्षा को लेकर जीपीएससी ने एक बड़ा ऐलान भी कर दिया है जेपीएससी ने कहा कि अगले आदेश तक होने वाले जेपीएससी मेंस की परीक्षा स्थगित रहेगी।
फिलहाल सीआईडी की जांच लगातार जारी है। जब्त किए गए दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, डिजिटल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच एजेंसी का फोकस पूरे भर्ती प्रक्रिया की कड़ियों को जोड़ने और यह पता लगाने पर है कि कथित अनियमितताओं की शुरुआत कहां से हुई तथा इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।
राज्यभर के लाखों अभ्यर्थियों की निगाहें अब सीआईडी की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं तथा यदि नए साक्ष्य सामने आते हैं तो गिरफ्तारियों का दायरा भी बढ़ सकता है। फिलहाल यह मामला झारखंड की सबसे महत्वपूर्ण भर्ती जांचों में से एक बन चुका है और आने वाले दिनों में इसकी दिशा राज्य की भर्ती व्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव डाल सकती है।

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