
पेपर लीक और सेटिंग के आरोपों के बाद एक तरफ सरकार ने CID से जांच कराई है, तो दूसरी तरफ सड़कों पर अभ्यर्थियों का विरोध हर दिन तेज होता जा रहा है। इस आंदोलन के तहत JPSC कार्यालय के बाहर बीते कई दिनों से अभ्यर्थियों का जमावड़ा लगा है। इसी क्रम में कुछ अभ्यर्थी अपना मुंह कपड़े से ढककर आयोग पहुंचे। उनका कहना था कि जब सिस्टम ने ही उनका भविष्य "ढक" दिया है तो वे भी अपना चेहरा ढककर विरोध करेंगे।
कई छात्रों ने पोस्टर-बैनर पर JPSC का नया नाम "झोल-झाल सेटिंग कमिशन सर्विस" लिख दिया और इसी नाम से नारेबाजी की। अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि सरकार द्वारा CID जांच के आदेश और कुछ अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद भी उन्हें संतुष्टि नहीं है। पीड़ित छात्रों का आरोप है कि हर बार परीक्षा से पहले पेपर लीक की खबर आती है, जांच होती है, कुछ छोटे कर्मियों पर कार्रवाई होती है, लेकिन असली साजिशकर्ता बच जाते हैं यानी छोटी मछलियों पर गाज गिरती है और बड़ी मछलियां निकल जाती है। छात्रों की एक ही मांग है कि इस पूरे प्रकरण की जांच पारदर्शी और निष्पक्ष एजेंसी से हो ताकि दोषियों को सजा मिले और मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को न्याय मिले।
प्रकरण में राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CID को सौंपी है। जिसे लेकर सुबह सवेरे से आयोग के भीतर अधिकारियों की टीम तो बाहर जवानों की तैनाती लगी रही , CID ने JPSC कार्यालय से महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और CCTV फुटेज जब्त किए। जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर CID ने JPSC के उप परीक्षा नियंत्रक समेत परीक्षा से जुड़े 7 अन्य कर्मियों को हिरासत में लिया है। फिलहाल सभी से रांची CID मुख्यालय में पूछताछ जारी है।
CID अधिकारियों और सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच में प्रश्नपत्र लीक और सेटिंग से जुड़े कई सुराग मिले हैं। हालांकि अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना है।
इस बीच JPSC की PT परीक्षा को लेकर भी अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति बरकरार है। छात्र संगठनों ने मांग की है कि जब तक CID जांच पूरी नहीं हो जाती और दोषियों की पहचान नहीं हो जाती, तब तक आगे की भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि दूषित प्रक्रिया के तहत ली गई परीक्षा का कोई मतलब नहीं है।
इस मुद्दे को लेकर राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा भी सड़क पर उतर आई। और बड़ी संख्या में प्रदर्शन करते हुए लोक सेवा आयोग के कार्यालय सहित झारखंड प्रदेश कांग्रेस कार्यालय का घेराव करने पहुंचे। प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने JPSC कार्यालय और प्रदेश कांग्रेस कार्यालय का घेराव किया। क्योंकि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत प्रशासन की ओर से लोक सेवा आयोग के करीब बैरिकेडिंग लगाई गई थी ताकि प्रदर्शनकारियों को रोका जा सके। लेकिन एका एक जैसे ही प्रदर्शनकारी बेरीकेटिंग तक आए और प्रशासन के साथ नोक झोंक हुई भीड़ बैरिकेडिंग को तोड़कर आयोग के मुख्य द्वार तक पहुंचे और जमकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों की भीड़ अधिक होने की वजह कहे या फिर नेताओं के बड़े चेहरे उनके सामने पुलिस प्रशासन की पूरी टीम नाकाम, बेबस और अपने आप को बौना महसूस करती रही।
प्रदर्शन में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, विधायक सीपी सिंह, रविन्द्र राय, प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव, मनोज सिंह सहित हजारों कार्यकर्ता शामिल हुए। भाजपा नेताओं ने सीधे शब्दों में कहा कि "हमें राज्य सरकार की CID जांच पर भरोसा नहीं है।
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि JPSC को पिछले 6 सालों में भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस घोटाले का असली मास्टरमाइंड मुख्यमंत्री आवास में बैठा है और उसी को बचाने के लिए CID जांच को कमजोर किया जा रहा है। भाजपा ने 14वीं JPSC सहित सभी विवादित भर्तियों की CBI जांच की मांग की है।
