
RANCHI: 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर जारी विवाद के बीच आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए. साथ ही राज्य गठन के बाद अब तक जेपीएससी द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं की भी जांच कराई जानी चाहिए, ताकि किसी तरह की शंका और विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो सके.
पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि जब किसी परीक्षा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और जांच का दायरा बढ़ रहा है तो केवल एक परीक्षा तक सीमित रहने के बजाय व्यापक स्तर पर जांच होना आवश्यक है. उनके अनुसार, इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि कहीं किसी स्तर पर कोई अनियमितता हुई है या नहीं. उन्होंने कहा कि पारदर्शिता बनाए रखने और युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए निष्पक्ष जांच ही सबसे बेहतर रास्ता है.
निष्पक्ष जांच हो इसलिए दिया इस्तीफा
उन्होनें कहा कि जब आयोग की जांच शुरू हुई तब मैंने महसूस किया कि पद पर बने रहने से जांच प्रभावित होने की आशंका जताई जा सकती है. इसलिए मैंने स्वयं इस्तीफा देना उचित समझा, ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सके. अब जांच एजेंसी के पास पूरी आजादी है. अब मैं एक साधारण नागरिक हूं, जांच एजेंसी जो भी सहयोग चाहेगी, मैं वह देता रहूंगा. जब मैंने पद संभाला था तो मन में तो था कि बहुत कुछ करूंगा और उसपर काफी हद तक मैं आगे भी बढ़ रहा था, लेकिन वह लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया, इसलिए थोड़ा रिग्रेट है. लेकिन निष्पक्ष जांच के लिए मुझे इससे अलग होना पड़ा. उन्होनें साफ कहा कि मैंने किसी दबाव में इस्तीफा नहीं दिया. मैं ऐसा नहीं हूं.
ओएमआर शीट और बिना सिग्नेचर वाले परिणाम के मामले में परीक्षा एजेंसी ही सही जानकारी दे सकती है
JPSC के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि ओएमआर शीट और बिना सिग्नेचर वाले परिणाम के मामले में परीक्षा एजेंसी ही सही जानकारी दे सकती है. मुझे इसकी विस्तृत जानकारी नहीं है. बिना हस्ताक्षर वाले पीटी रिजल्ट का जो सवाल है. उसके बारे में बता दूं कि हमारा रूल ऑफ प्रोसिजर 2002 में यह अंकित है कि केवल फाइनल मेरिट लिस्ट की तैयारी के समय, जिसमें इंटरव्यू के मार्क्स भी सम्मिलित होंगे, उसी में मेंबर्स के स्क्रूटनी के रोल हैं. उसके पहले के किसी मेंबर के स्क्रूटनी का रोल अंकित नहीं है. इसलिए जो अखबारों में निकला, वह वही है.
कंपनी ब्लैकलिस्टेड थी इसकी नहीं थी जानकारी
उन्होनें कहा कि कोई भी जिम्मेदार व्यक्ति यह नहीं चाहेगा कि किसी ब्लैकलिस्टेड कंपनी को काम मिले. हम भी यही चाहते हैं कि ब्लैकलिस्टेड कंपनी को काम ना मिले. हम ये भी देखते हैं कि जिस कंपनी को हम काम दे रहे हैं, उनके पास क्षमता और संसाधन ठीक हैं या नहीं. इसी के आधार पर हम फैसला लेते हैं. जब हमने जांच की थी, तब ऐसी कोई जानकारी हमारे सामने नहीं थी कि कंपनी ब्लैकलिस्टेड है. यदि ऐसी जानकारी पहले होती तो निश्चित रूप से उसे काम नहीं दिया जाता." जेपीएससी का इतिहास देखेंगे तो मालूम है कि कुछ-कुछ परीक्षाओं से संबंधित केस चल रहे हैं. यह अब सरकार का निर्णय होगा कि जांच होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए. इस पर मैं कुछ नहीं कह सकता. हां, जब जांच होती है तो निष्पक्ष जांच जरूर होनी चाहिए. इसी उद्देश्य से मैंने इस्तीफा दिया ताकि निष्पक्ष जांच हो. अगर मैं चेयरमैन पद पर बैठा ही रहता और जांच कराता तो क्या हो जाता. इसलिए मैंने तुरंत रिजाइन किया. ताकि एक पारदर्शी और निष्पक्ष जांच शुरू हो.