झारखंड में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता, एक करोड़ के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा गिरफ्तारBy Admin Wed, 29 July 2026 11:47 AM

रांची। झारखंड में माओवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य और देश के सबसे वांछित माओवादी नेताओं में शामिल मिसिर बेसरा को उसके दो करीबी साथियों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है। मिसिर बेसरा पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।

अधिकारियों के अनुसार, यह गिरफ्तारी मंगलवार देर रात झारखंड पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और कोबरा बटालियन द्वारा धनबाद और गिरिडीह जिले की सीमा पर चलाए गए संयुक्त अभियान के दौरान हुई। सुरक्षा एजेंसियों को उसके ठिकाने और गतिविधियों की सटीक खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।

मिसिर बेसरा के साथ गिरफ्तार किए गए दो अन्य माओवादी नेताओं की पहचान मेहनत उर्फ मोच्छू एवं विभीषण मुर्मू तथा गौरव उर्फ सौरभ के रूप में हुई है। दोनों भाकपा (माओवादी) की क्षेत्रीय समिति के सदस्य हैं और प्रत्येक पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

अभियान के दौरान दो अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है। सुरक्षा एजेंसियां उनसे पूछताछ कर संगठन से उनके संबंधों और भूमिका की जांच कर रही हैं।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब मंगलवार को ही रांची में 16 माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया था। इनमें देवान मुर्मू उर्फ शनिचरवा भी शामिल था, जो लंबे समय तक मिसिर बेसरा का निजी अंगरक्षक रह चुका है। अधिकारियों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों से मिली अहम जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने रणनीति बनाकर यह अभियान चलाया और मिसिर बेसरा को दबोचने में सफलता हासिल की।

मिसिर बेसरा, जिसे भास्कर, सुनीर्मल और सागर जैसे नामों से भी जाना जाता है, झारखंड के गिरिडीह जिले के पीरटांड़ क्षेत्र का रहने वाला है। करीब चार दशक पहले उसने माओवादी संगठन का दामन थामा था और धीरे-धीरे संगठन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली इकाई पोलित ब्यूरो तक पहुंच गया।

उसके खिलाफ झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन मामलों में हत्या, सुरक्षा बलों पर हमले, आईईडी विस्फोट, रंगदारी और अवैध वसूली जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

मिसिर बेसरा को वर्ष 2007 में खूंटी पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन 2009 में बिहार के लखीसराय अदालत परिसर पर माओवादियों के हमले के दौरान वह पुलिस हिरासत से फरार हो गया था। इसके बाद से वह लगभग दो दशक तक सुरक्षा एजेंसियों की सबसे वांछित सूची में शामिल रहा।

सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी झारखंड में माओवादी संगठन के नेतृत्व ढांचे के लिए बड़ा झटका है। पिछले कुछ महीनों में संगठन को लगातार मुठभेड़ों, गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ा है।

फिलहाल मिसिर बेसरा और उसके साथियों से केंद्रीय और राज्य की सुरक्षा एजेंसियां एक गोपनीय स्थान पर पूछताछ कर रही हैं। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ से माओवादी संगठन के सक्रिय नेटवर्क, हथियारों के ठिकानों, फंडिंग के स्रोतों, संचालन की रणनीति और अन्य प्रमुख सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

 

With inputs from IANS