CM हेमंत ने PM मोदी को पत्र लिखकर छात्रवृत्ति योजना के लिए कम मिल रही राशि को बढ़ाने का किया अनुरोधBy Admin Thu, 30 July 2026 03:18 PM

Ranchi :  झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य के छात्रों को छात्रवृत्ति के रूप में मिलने वाली राशि को बढ़ाने की मांग की है. मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि साल 2021-22 के बाद अल्पसंख्यकों के लिए कोई भी राशि केंद्र सरकार नहीं दे रही है, इसे दोबारा शुरू किया जाये.
 
मुख्यमंत्री ने पत्र में उल्लेख किया है कि साल 2024-25 में राज्य द्वारा प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 66.14 करोड़ रुपये  छात्रवृत्ति की मांग की गई थी. लेकिन केंद्र से सिर्फ 12.61 करोड़ रुपये ही मिला. साल 2025-26 में 45.91 करोड़ रुपये की मांग की गई थी, लेकिन सिर्फ 3.95 करोड़ रुपये मिला. 

इसी तरह पोस्ट मैट्रिक छात्रों को छात्रवृत्ति देने के लिए साल 2024-25 में 353.21 करोड़ रुपये की मांग के बदले सिर्फ 33.57 करोड़ रुपये मिला. साल 2025-26 में इसी मद में 370.87 करोड़ रुपये की मांग की गई थी, लेकिन सिर्फ 58.22 करोड़ रुपये ही मिला. 
 
मुख्यमंत्री ने पत्र में आगे लिखा है कि राज्य के लिए वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में केंद्र सरकार द्वारा क्रमशः 23.78 और 32.70 करोड़ रुपये की राशि नेशनल एलोकेशन के रूप में स्वीकृत की गई थी. यह राशि झारखंड जैसे राज्य के लिए बहुत कम है, इसलिए इस राशि में बढ़ोतरी की जरूरत है.
 
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के एससी-एसटी छात्र-छात्राओं का जिक्र करते हुए पत्र में लिखा है कि प्री मैट्रिक दिवाकालीन छात्रों के लिए प्रतिवर्ष 3000 रुपये निर्धारित है. केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्री एवं पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति मद में राज्य के लिए कोई राशि विमुक्त नहीं किया है.
 
वित्तीय वर्ष 2024-25 में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के लिए 200 करोड़ रुपये विमुक्त किया गया था. लेकिन उस वित्तीय वर्ष में जारी राशि वास्तव में वित्तीय वर्ष 2022-23 के एरियर की राशि थी. साल 2023-24 की 42 प्रतिशत प्रथम किस्त के रूप में दिया गया है.
 
इससे स्पष्ट है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 की 58 प्रतिशत राशि वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 की संपूर्ण केंद्रांश राज्य के लिए अपर्याप्त है.  इसी प्रकार प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति के मद में साल 2024-25 और 2025-26 में कोई भी राशि राज्य को नहीं मिली.
 
मुख्यमंत्री ने पत्र में आगे लिखा है कि अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और पिछड़ा वर्ग के लिए प्री मैट्रिक स्तर पर छात्रवृत्ति की रकम में भिन्नता है. यह क्रमशः 3000, 3500 और 4000 रुपये प्रति छात्र है. इस दर से भी अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए निर्धारित दर अन्य की तूलना में कम है. 
 
मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि राज्य में अल्पसंख्यकों की आबादी 23.29 प्रतिशत है. भारत सरकार ने साल 2021-22 के बाद से अल्पसंख्यकों के लिए केंद्र सरकार द्वारा संचालित छात्रवृत्ति योजना में एक भी राशि नहीं दी है. इससे अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक उत्थान पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है, इसलिए इस योजना को फिर से शुरू किया जाये.
 

सीएम ने पत्र के शुरुआत में लिखा है कि झारखंड में शिक्षा को प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने का अभियान चलाया जा रहा है, ताकि समाज का कमजोर वर्ग मुख्यधारा में आ सके. झारखंड सरकार की प्राथमिकताओं में यह सबसे ऊपर है. झारखंड में भौगोलिक कठिनाइयों, सीमित संसाधनों और वंचित समुदायों की संख्या अन्य राज्यों की अपेक्षा अधिक है, इसलिए यहां के छात्रों को सहायता देना चुनौतीपूर्ण है. छात्रों को सहायता देने के लिए केंद्र सरकार की मदद जरूरी है.

ADVERTISEMENT
Advertisement