

Jharkhand Road Projects Update: झारखंड में लंबे समय से अटकी सड़क, पुल और पुलिया निर्माण परियोजनाओं को जल्द नई रफ्तार मिल सकती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर खान एवं भूतत्व विभाग ने मिट्टी और मोरम की ढुलाई के लिए ई-परिवहन चालान (E-Transport Challan) की अनिवार्यता में छह महीने की राहत देने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को जल्द ही राज्य कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। यदि इसे स्वीकृति मिलती है तो करीब 5,000 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का रास्ता साफ हो जाएगा।
जानकारी के अनुसार, मई 2026 से लागू ई-चालान व्यवस्था के कारण सड़क निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि मिट्टी और मोरम के लिए लीज जारी करने का स्पष्ट प्रावधान नहीं होने के कारण ठेकेदारों को ई-परिवहन चालान नहीं मिल पा रहा है। परिणामस्वरूप वे अपने बिलों के साथ रॉयल्टी चालान जमा नहीं कर पा रहे हैं और भुगतान भी अटक गया है। इससे नई परियोजनाओं की शुरुआत और पुरानी योजनाओं का काम दोनों प्रभावित हुए हैं।
ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव मनोज कुमार ने इस संबंध में खान विभाग को पत्र लिखकर बताया था कि मिट्टी और मोरम से जुड़े लाइसेंस जारी नहीं होने के कारण ठेकेदारों के सामने गंभीर व्यावहारिक समस्या खड़ी हो गई है। उन्होंने सुझाव दिया कि जब तक नई व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो जाती, तब तक पुरानी रॉयल्टी भुगतान प्रणाली को जारी रखा जाए। इसी के बाद खान विभाग ने राहत का प्रस्ताव तैयार किया।
राजधानी रांची में भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं इस वजह से प्रभावित हैं। इनमें पंडरा से कांके रोड फोरलेन (253 करोड़), रिंग रोड से एयरपोर्ट फोरलेन (280 करोड़), खेलगांव से दुर्गा सोरेन चौक फोरलेन (158 करोड़), डीएवी पुंदाग से डीएवी हेहल सड़क (102 करोड़) और अन्य सड़क निर्माण योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा चिरौंदी से बरियातू होते हुए फायरिंग रेंज रोड तथा धुर्वा विवेकानंद स्कूल मोड़ से हाईकोर्ट होते हुए नयासराय तक बनने वाली दो बड़ी सड़क परियोजनाएं भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है।
पहले की व्यवस्था के तहत ठेकेदार रैयती या गैर-मजरूआ भूमि से मिट्टी और मोरम उठाकर रॉयल्टी की राशि जमा करते थे। संबंधित विभाग बिल से यह राशि काटकर सरकार के खाते में जमा करा देता था। नई ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद ई-परिवहन चालान अनिवार्य कर दिया गया, लेकिन व्यावहारिक समस्याओं के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हो गया।
यदि कैबिनेट इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो अगले छह महीने तक ठेकेदारों को राहत मिलेगी और झारखंड में सड़क, पुल एवं पुलिया निर्माण परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ सकेंगी। इससे न केवल आधारभूत संरचना मजबूत होगी, बल्कि रोजगार, परिवहन सुविधा और राज्य के आर्थिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
