




रांची: विश्व आदिवासी महोत्सव को लेकर झारखंड की राजधानी रांची पूरी तरह आदिवासी संस्कृति के रंग में रंग गई है। रविवार को बिरसा मुंडा जेल म्यूजियम से लेकर मोरहाबादी मैदान तक उत्सव का माहौल देखने को मिल रहा है। जगह-जगह आदिवासी कला, संस्कृति, परंपरा, प्रकृति और जीवन दर्शन की झलक दिखाई दे रही है।
महोत्सव को लेकर कलाकारों में भी जबरदस्त उत्साह है। राजधानी की सड़कों और आयोजन स्थलों पर ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई दे रही है। अलग-अलग स्थानों से पहुंचे कलाकार अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों के जरिए झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सामने रख रहे हैं। उनके नृत्य, संगीत और पारंपरिक वेशभूषा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
इस आयोजन के जरिए झारखंड की आदिवासी कला और संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है। पूरे शहर में ऐसा माहौल है, मानो राजधानी खुद आदिवासी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का मंच बन गई हो।
महोत्सव को लेकर रांची जिला प्रशासन ने भी सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर पूरी तैयारी कर ली है। प्रमुख आयोजन स्थलों पर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की तैनाती की गई है। इसके अलावा यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने और लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।
महोत्सव का विधिवत कार्यक्रम दोपहर 1 बजे से शुरू होगा, लेकिन उससे पहले ही राजधानी में उत्सव का माहौल बन चुका है। बिरसा मुंडा जेल म्यूजियम और मोरहाबादी क्षेत्र में आने वाले लोगों के लिए भी विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
महोत्सव की तैयारियों की निगरानी खुद रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को आयोजन से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की टीम लगातार आयोजन स्थल की तैयारियों, सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा ले रही है।
विश्व आदिवासी महोत्सव के जरिए झारखंड की जल, जंगल, जमीन, प्रकृति और पारंपरिक जीवनशैली से जुड़ी संस्कृति को दुनिया के सामने रखने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में रांची में आयोजित यह महोत्सव सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि झारखंड की आदिवासी पहचान और विरासत को प्रदर्शित करने का बड़ा अवसर भी माना जा रहा है।



