




रांची: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राजधानी के मोरहाबादी मैदान में आयोजित झारखंड आदिवासी महोत्सव-2026 के मंच से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक साथ संस्कृति और समकालीन मुद्दों पर स्पष्ट संदेश दिया। एक ओर उन्होंने राज्य की आदिवासी विरासत और जीवन-दर्शन को रेखांकित किया, वहीं दूसरी ओर चल रहे छात्र आंदोलन को लेकर भरोसा दिलाया कि सरकार पूरी गंभीरता से मामले को देख रही है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह महोत्सव झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, महान बलिदान गाथाओं और राज्य की 33 जनजातियों की गौरवशाली परंपराओं का साझा उत्सव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जहाँ प्रकृति की पूजा होती है, वहाँ संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक सुंदर और संतुलित तरीका बन जाती है।
मोरहाबादी मैदान में आयोजित इस दो दिवसीय महोत्सव में झारखंड की जनजातीय पहचान अपने पूरे वैभव के साथ नजर आई। मांदर और नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकार और नागपुरी, झूमर, सरहुल व कर्म जैसे लोक नृत्यों की प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक रंग में रंग दिया। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से आदिवासी जीवनशैली और परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
इसी मंच से मुख्यमंत्री ने राज्य में चल रहे छात्र आंदोलन पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकार आंदोलनरत छात्र-छात्राओं की मांगों को गंभीरता से सुन रही है और पारदर्शिता के साथ पूरे मामले की जांच की जा रही है। हाल के घटनाक्रमों के बीच उन्होंने यह भी संकेत दिया कि परीक्षा से जुड़े विवादों में गड़बड़ियों को चिन्हित किया गया है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। हाल के दिनों में सरकार और छात्रों के बीच संवाद की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे समाधान की दिशा में प्रयास तेज हुए हैं।
मुख्यमंत्री ने छात्रों से संयम और भरोसा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सरकार उनके अधिकारों और भविष्य को लेकर पूरी तरह संवेदनशील है। साथ ही उन्होंने विपक्षी दलों को चेतावनी दी कि छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।
कुल मिलाकर, विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर आयोजित यह महोत्सव जहां झारखंड की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने का मंच बना, वहीं मुख्यमंत्री के बयान ने यह संकेत भी दिया कि सरकार संस्कृति के साथ-साथ युवाओं के मुद्दों पर भी सक्रिय और जवाबदेह रहने की कोशिश में है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि आश्वासन के बाद जमीनी स्तर पर क्या ठोस कदम सामने आते हैं।



