सिर्फ 100 रुपये में JFC की डील फाइनल, टाटा स्टील ने चर्चिल ब्रदर्स को सौंपी कमानBy Admin Fri, 14 August 2026 05:15 PM

जमशेदपुर: जमशेदपुर FC के सफर में अब एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। टाटा स्टील ने क्लब से जुड़ी कंपनी जमशेदपुर फुटबॉल एंड स्पोर्टिंग प्राइवेट लिमिटेड यानी JFSPL की पूरी हिस्सेदारी चर्चिल ब्रदर्स स्पोर्ट्स क्लब प्राइवेट लिमिटेड को सौंपने का फैसला किया है। शुक्रवार को हुई टाटा स्टील बोर्ड कमेटी की बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। खास बात यह है कि 100 फीसदी हिस्सेदारी का यह ट्रांसफर महज 100 रुपये के सांकेतिक मूल्य पर होगा।

31 अगस्त तक पूरी हो सकती है डील

हिस्सेदारी ट्रांसफर के तहत JFSPL के 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 4.08 करोड़ शेयर चर्चिल ब्रदर्स को दिए जाएंगे। AIFF के नियमों के तहत जरूरी मंजूरियां मिलने के बाद यह प्रक्रिया 31 अगस्त 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है। इसके बाद JFSPL का नियंत्रण चर्चिल ब्रदर्स के पास चला जाएगा और जमशेदपुर FC के संचालन में नए मालिक की भूमिका शुरू होगी।

JFC के खिलाड़ियों को सबसे बड़ी राहत

स्वामित्व बदलने के बावजूद क्लब के खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के लिए फिलहाल राहत की खबर है। मौजूदा अनुबंध जारी रहेंगे और सितंबर से चर्चिल ब्रदर्स इन कॉन्ट्रैक्ट्स को अपने अधीन लेगा। इसमें ISL लाइसेंस, 12 खिलाड़ी और दो कोच शामिल हैं। यानी क्लब का मालिक बदल सकता है, लेकिन मैदान पर JFC की टीम का सफर अचानक रुकने वाला नहीं है।

चर्चिल ब्रदर्स के पास चार दशक का फुटबॉल अनुभव

जमशेदपुर FC की नई कमान जिस क्लब के पास जा रही है, उसका भारतीय फुटबॉल में लंबा इतिहास है। गोवा का चर्चिल ब्रदर्स करीब चार दशक से फुटबॉल से जुड़ा है और दो बार आई-लीग का चैंपियन रह चुका है। टाटा स्टील के कॉरपोरेट सर्विसेज के वाइस प्रेसिडेंट डीबी सुंदर रामम ने भी इसे भारतीय फुटबॉल के एक ऐतिहासिक क्लब के साथ साझेदारी के तौर पर बताया है। उनके मुताबिक, इस बदलाव से खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

क्लब से हटकर अब युवा फुटबॉल पर टाटा का फोकस

JFC की हिस्सेदारी ट्रांसफर करने का मतलब यह नहीं है कि टाटा स्टील फुटबॉल से दूरी बना रही है। कंपनी अब ग्रासरूट और युवा प्रतिभाओं को तैयार करने पर ज्यादा ध्यान देने की बात कह रही है। 1987 में शुरू हुई टाटा फुटबॉल एकेडमी अब तक 300 से अधिक कैडेट्स को प्रशिक्षित कर चुकी है। इनमें करीब 150 खिलाड़ी भारतीय राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बन चुके हैं।

JFSPL की वित्तीय स्थिति भी रही चुनौती

JFSPL का वित्तीय प्रदर्शन भी इस बदलाव के पीछे अहम पहलू है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का कारोबार 32.23 करोड़ रुपये रहा, जबकि 31 मार्च 2026 तक उसकी नेटवर्थ माइनस 5.8 करोड़ रुपये दर्ज की गई थी। अब 31 अगस्त तक हिस्सेदारी ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है। यानी जमशेदपुर FC की कहानी में टाटा युग का एक अध्याय खत्म होकर चर्चिल ब्रदर्स के साथ एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है—लेकिन मैदान पर JFC की पहचान और खिलाड़ियों का सफर फिलहाल जारी रहेगा।