14वीं JPSC में बड़ा खेल? OMR से अध्यक्ष तक पहुंची CID की जांचBy Admin Sun, 16 August 2026 04:33 PM

झारखंड की 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला अब सिर्फ OMR शीट की हेराफेरी या परीक्षा एजेंसी की भूमिका तक सीमित नहीं रह गया है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे सवालों का दायरा भी बढ़ता जा रहा है। अब जांच की कड़ियां आयोग के अधिकारियों से लेकर परीक्षा एजेंसी और कथित आर्थिक नेटवर्क तक पहुंचती दिखाई दे रही हैं। सबसे बड़ा सवाल है, आखिर 14वीं JPSC PT में OMR और डिजिटल रिकॉर्ड के साथ कथित छेड़छाड़ कैसे हुई?

CID की जांच में आयोग और परीक्षा एजेंसी के कार्यालयों से OMR शीट, कंप्यूटर और डिजिटल उपकरणों से जुड़े साक्ष्य जब्त किए गए हैं। जांच एजेंसी ने PT में सफल अभ्यर्थियों से उनकी OMR कार्बन कॉपी भी मांगी, ताकि अभ्यर्थियों के पास मौजूद कॉपी और आयोग के रिकॉर्ड में उपलब्ध OMR का मिलान किया जा सके।

इसी जांच के दौरान उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से पूछताछ में सामने आए कथित तथ्यों ने तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते की भूमिका को भी जांच के दायरे में ला दिया। CID ने श्वेता गुप्ता समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की। वहीं खियांग्ते से भी कई दौर में पूछताछ हुई। एक चरण में दोनों को आमने-सामने बैठाकर उनके बयानों का मिलान किया गया।

जांच में JPSC कर्मचारी सोनू कुमार की भूमिका को लेकर भी आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि श्वेता गुप्ता के निर्देश पर OMR और डिजिटल रिकॉर्ड में कथित हेरफेर में उसने मदद की। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के निष्कर्ष के बाद ही होगी।

अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है अगर OMR और रिजल्ट की प्रक्रिया में अंदर से छेड़छाड़ हुई, तो क्या यह काम सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों के भरोसे संभव था?

CID ने तत्कालीन अध्यक्ष से परीक्षा संचालन, प्रश्नपत्र, रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया और TDPL एजेंसी के चयन को लेकर पूछताछ की। एक रिपोर्ट में यह दावा भी सामने आया कि आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष को 500 OMR शीट में कथित हेराफेरी की जानकारी दी गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि जांच के अंतिम निष्कर्ष से ही होगी।

इसके बाद जांच का फोकस TDPL पर भी है। आरोप है कि परीक्षा का काम देने से पहले एजेंसी की प्रक्रिया और उसके पुराने रिकॉर्ड की पर्याप्त जांच नहीं की गई। ब्लैकलिस्टिंग से जुड़े सवाल भी जांच में सामने आए हैं। बाद में CID ने एल. खियांग्ते को गिरफ्तार किया।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती।

जांच अब 14वीं JPSC PT से आगे बढ़ती दिखाई दे रही है। TDPL द्वारा आयोजित दूसरी परीक्षाएं भी जांच के दायरे में आने की बात सामने आई है। यानी सवाल सिर्फ एक परीक्षा का नहीं है। सवाल यह है कि क्या परीक्षा संचालन का वही नेटवर्क दूसरी भर्ती परीक्षाओं में भी सक्रिय था?

JPSC की FRO और ACF जैसी परीक्षाओं को लेकर भी पैसे लेकर पद दिलाने और इंटरव्यू के अंकों में कथित हेरफेर जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

और अब इस मामले में ED की एंट्री ने वित्तीय पहलू को भी अहम बना दिया है। सवाल उठ रहे हैं क्या कथित अनियमितताओं के पीछे पैसों का लेनदेन हुआ? अगर हुआ, तो पैसा किस तक पहुंचा? क्या अभ्यर्थियों से रकम वसूलने वाला कोई संगठित नेटवर्क था?

पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ें तो तस्वीर कुछ ऐसी बनती है एजेंसी का चयन, परीक्षा संचालन, OMR की सुरक्षा, डिजिटल मूल्यांकन, रिजल्ट तैयार करना, कथित हेरफेर, अभ्यर्थियों को लाभ और फिर संभावित आर्थिक लेनदेन।

लेकिन यहां पत्रकारिता की एक जरूरी सावधानी भी है। उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष घोटाले में शामिल थे। इतना जरूर कहा जा सकता है कि उनकी भूमिका जांच के दायरे में रही, उनसे कई दौर में पूछताछ हुई और बाद में CID ने उन्हें गिरफ्तार किया। किसी की अंतिम दोषसिद्धि का फैसला अदालत और जांच के अंतिम निष्कर्ष पर निर्भर करेगा।

अब असली सवाल यही हैं—

किसने OMR बदली?
किसने डिजिटल रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ की?
TDPL को परीक्षा का काम किस आधार पर मिला?
क्या अधिकारियों को कथित गड़बड़ी की पहले से जानकारी थी?
अगर जानकारी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
और सबसे बड़ा सवाल,क्या पूरा खेल सिर्फ 14वीं JPSC परीक्षा तक सीमित था?
14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने की घोषणा के बाद अभ्यर्थियों के लिए भले ही एक रास्ता साफ हुआ हो, लेकिन कथित गड़बड़ी के पीछे की पूरी कहानी अभी बाकी है।
अब CID और ED की जांच यह तय करेगी कि मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही था या इसके पीछे कोई संगठित भर्ती नेटवर्क काम कर रहा था। फिलहाल इतना जरूर साफ है कि जांच OMR से निकलकर आयोग के शीर्ष स्तर, परीक्षा एजेंसी और संभावित आर्थिक लेनदेन तक पहुंच चुकी है। और इस कहानी की आखिरी कड़ी कहां जाकर जुड़ती है, यही सबसे बड़ा सवाल है।