Breaking JPSC धांधली की शिकायत जनवरी में ही पहुंची, कार्रवाई के बजाय दबा दिया गया मामलाBy Admin Tue, 18 August 2026 10:54 AM

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की विभिन्न परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांगते को जनवरी 2026 में ही शिकायत मिल गई थी। शिकायतकर्ता सौरभ बर्मन ने अपनी शिकायत में परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जानकारी देते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि, शिकायत मिलने के बावजूद आयोग स्तर से मामले में कार्रवाई नहीं होने और इसे दबा दिए जाने का आरोप लगाया गया है। अब CID की जांच के दौरान यह शिकायत सामने आई है, जिसे जांच एजेंसी ने न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया है।

150 से अधिक ACF और 350 से ज्यादा FRO OMR में हेरफेर का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ACF परीक्षा की 150 से अधिक और FRO परीक्षा की 350 से अधिक OMR उत्तर पुस्तिकाओं में अलग-अलग स्थानों पर कथित तौर पर छेड़छाड़ या बदलाव किया गया। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि कथित गतिविधियों को शहर के अलग-अलग स्थानों से संचालित किए जाने की जानकारी सामने आई थी।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि अभ्यर्थियों से प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के नाम पर कथित तौर पर करीब 5 लाख रुपये और अंतिम चयन के लिए लगभग 25 लाख रुपये तक की मांग की गई।

अध्यक्ष को दी गई थी औपचारिक शिकायत

JPSC की ओर से आयोजित वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO) और सहायक वन संरक्षक (ACF) परीक्षाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आयोग के अध्यक्ष को औपचारिक शिकायत दी गई थी। इसमें परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी Data Processing Private Limited (TDPL) और उससे जुड़े कुछ लोगों की भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई थी।

शिकायत में OMR उत्तर पुस्तिकाओं में कथित हेरफेर, डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया में अनधिकृत बदलाव, अयोग्य अभ्यर्थियों को मेरिट सूची में शामिल कराने तथा चयन के नाम पर कथित रूप से बड़ी रकम मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।

FRO-ACF परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल

शिकायत में FRO विज्ञापन संख्या 04/2024 और ACF विज्ञापन संख्या 03/2024 के तहत हुई परीक्षाओं की प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए थे। आरोप है कि OMR उत्तर पुस्तिकाओं में कथित हेरफेर और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में अनधिकृत बदलाव के जरिए कुछ अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा की चयन सूची में शामिल कराया गया।

CID की जांच में जनवरी में दी गई इस शिकायत का सामने आना अब महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि आयोग को परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की शिकायत पहले ही मिल गई थी, तो समय रहते इसकी जांच क्यों नहीं कराई गई और शिकायत पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।