मुद्दा केवल घोटाले की जांच का नहीं, बल्कि जांच में घोटाले का भी इसलिए सीबीआई जांच जरूरी : रघुवर दास By Admin Wed, 19 August 2026 12:29 PM

RANCHI : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर कहा कि झारखंड में मुद्दा केवल घोटाले की जांच का नहीं, बल्कि जांच में घोटाले का भी है।  उन्होनें सीएम हेमंत सोरेन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हेमंत सोरेन युवाओं के साथ कथित धोखेबाजी और ओछी राजनीति करना बंद करें और राज्य के युवाओं को सही मायने में इंसाफ देना चाहते हैं तो पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराएं। छात्रों ने भी सरकार से सीबीआई जांच की ही मांग की है। कहा कि सरकार ने वर्ष 2014 से जांच कराने की घोषणा की है उसका स्वागत है लेकिन सीआईडी जांच पर भरोसा नहीं है। रघुवर दास ने कहा कि छात्रों की तीन प्रमुख मांगें रही हैं। इनमें जेपीएससी पीटी परीक्षा रद्द करना, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करना और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराना प्रमुख है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 9 अगस्त को जेपीएससी पीटी रद्द करने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक इसकी अधिसूचना जारी नहीं हुई है। उनके मुताबिक, परीक्षा रद्द करने का अधिकार जेपीएससी के पास सुरक्षित है। मौजूदा स्थिति में जेपीएससी में न अध्यक्ष है और न ही सदस्य, जबकि जेपीएससी अध्यक्ष और परीक्षा कंट्रोलर के जेल में होने का दावा करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में अधिसूचना जारी कौन करेगा।पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने कार्यकाल में हुई प्रतियोगी परीक्षाओं का बचाव करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में जितनी परीक्षाएं हुईं, उनमें किसी भी परीक्षा को लेकर किसी छात्र ने धांधली की शिकायत नहीं की और न ही आंदोलन हुआ। उन्होंने कहा कि छठी जेपीएससी परीक्षा में हिंदी और अंग्रेजी के नंबर जोड़े जाने के सैद्धांतिक निर्णय को लेकर तकनीकी विवाद जरूर हुआ था, लेकिन सीट बेचे जाने या बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोप कभी नहीं लगे। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवाल किया कि अगर वर्ष 2019 में सत्ता संभालने के बाद उन्हें किसी तरह की गड़बड़ी की शिकायत मिली थी तो उन्होंने अब तक जांच क्यों नहीं करायी। रघुवर दास ने कहा कि छात्रों को सीबीआई जांच से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के करीबी मित्र और राजदार बताए जाने वाले आर्किटेक्ट विनोद सिंह के घर ईडी की कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर बड़ी संख्या में सीजीएल अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड मिले थे। उन्होंने कहा कि इसी मामले के कारण छात्रों के बीच सीबीआई जांच की मांग और मजबूत हुई है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया का उल्लेख उनके बयान में नहीं है।पूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे पत्र का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों को वैध माना है। रघुवर दास ने सवाल उठाया कि अगर छात्रों की मांग वैध है तो सरकार उनकी मांग के अनुरूप सीबीआई जांच क्यों नहीं करा रही है। रघुवर दास ने राहुल गांधी के रांची नहीं आने को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि राहुल गांधी आंदोलनरत छात्रों से मिलने रांची क्यों नहीं आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सत्ता पक्ष के विश्वस्त सूत्रों से उन्हें जानकारी मिली है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राहुल गांधी को रांची नहीं आने की सलाह दी है। रघुवर दास ने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी से कहा है कि अगर वह रांची आए तो चारों कांग्रेस मंत्रियों को हटा देंगे और सरकार को सत्ता से बाहर कर देंगे। उन्होंने कहा कि वह इस बात का पक्के तौर पर दावा कर रहे हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रघुवर दास ने उत्पाद सिपाही भर्ती की दौड़ के दौरान 19 आदिवासी और मूलवासी अभ्यर्थियों की मौत का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि उन्होंने अब तक मृत अभ्यर्थियों के परिवारों से मिलने या उन्हें मुआवजा देने की मांग मुख्यमंत्री से क्यों नहीं की। उन्होंने सवाल किया कि क्या झारखंड के आदिवासी और मूलवासी छात्रों के जीवन की कोई कीमत नहीं है।
CID जांच पर उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं की जांच कर रही सीआईडी पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि सीआईडी जांच का उद्देश्य दोषियों को सजा दिलाना नहीं, बल्कि सत्ता में बैठे प्रभावशाली लोगों और नौकरशाहों को बचाना तथा साक्ष्य मिटाना प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि टीडीपीएल द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं को रद्द किया गया है और वह इसका स्वागत करते हैं। लेकिन उनके मुताबिक, इसी सीआईडी की जांच में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को क्लीन चिट दी गई थी। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि जब सीआईडी की जांच ही सवालों के घेरे में है तो अब जांच कौन करेगा। रघुवर दास ने कहा कि छात्रों की मांग है कि जेपीएससी पीटी और जेएसएससी-सीजीएल की सभी परीक्षाओं की जांच सीबीआई से करायी जाए, ताकि दोषियों की पहचान कर उन्हें दंडित किया जा सके। उन्होंने जेएसएससी-सीजीएल में नियुक्त अभ्यर्थियों को लेकर भी अपनी बात रखी। उनका कहना था कि परीक्षमान अवधि के दौरान सरकार के पास किसी अभ्यर्थी को व्यक्तिगत आधार पर नौकरी से हटाने की शक्ति होती है, लेकिन यह पूरी नियुक्ति को रद्द करने पर लागू नहीं होती। उनके अनुसार, सफल अभ्यर्थियों के चरित्र और कार्यप्रणाली के आधार पर व्यक्तिगत निर्णय लिया जा सकता है।
पहले दागदार और योग्य अभ्यर्थियों में अंतर जरूरी
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरी नियुक्ति को रद्द करने से पहले व्यापक जांच जरूरी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि पूरी नियुक्ति रद्द करने के बजाय पहले मेरिट वाले अभ्यर्थियों और दागदार अभ्यर्थियों के बीच अंतर करना आवश्यक है। उनके अनुसार, जांच के बाद यदि कोई निष्कर्ष नहीं निकलता है, तभी पूरी नियुक्ति रद्द करना अंतिम विकल्प होना चाहिए। रघुवर दास ने राज्य सरकार से प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश करने की मांग की। साथ ही उन्होंने उत्पाद सिपाही भर्ती की दौड़ के दौरान जान गंवाने वाले 19 आदिवासी और मूलवासी अभ्यर्थियों के परिवारों को तत्काल एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए पारदर्शी जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।