
Ranchi : झारखंड सरकार ने JPSC और JSCC द्वारा आयोजित परीक्षाओं में व्याप्त अनियमितता के खिलाफ मंगलवार देर रात बड़ा एक्शन लिया है। राज्य सरकार के कार्मिक विभाग ने सीआईडी की जांच में मिले तथ्यों के आधार पर 22 परीक्षाओं को रद्द कर दिया है. जारी आदेश में छह परीक्षाओं की प्रक्रिया को स्थगित और 17 परीक्षाओं में संभावित अनियमितता की जांच की बात कही गयी है. 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को भी रद्द करने की घोषणा कार्मिक विभाग की अधिसूचना में है। इन परीक्षाओं में चयनित पदाधिकारी अब कार्मिक विभाग के इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख करने की तैयारी में हैं. प्राप्त जानकारी के अनुसार 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा के माध्यम से नियुक्त कुछ पदाधिकारियों की श्रावणी मेला में ड्यूटी लगाई गई थी. सरकार की ओर से जारी आदेश के बाद कई पदाधिकारी अपनी ड्यूटी छोड़कर रांची पहुंच गए हैं. उनका कहना है कि आदेश से उनकी नियुक्ति और भविष्य की सेवा पर सीधा असर पड़ सकता है, इसलिए अधिसूचना पर रोक लगाने और अपनी नियुक्ति को प्रभावित नहीं करने की मांग को लेकर कानूनी रास्ता अपनायेंगे. चयनित पदाधिकारियों का मुख्य तर्क है कि परीक्षा के अलग-अलग चरणों में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी TDPL की भूमिका समान नहीं थी. उनका कहना है कि किसी एक चरण में कथित अनियमितता के आधार पर पूरी परीक्षा और सभी चयनित अभ्यर्थियों के परिणाम को प्रभावित करना न्यायसंगत नहीं होगा. चयनित पदाधिकारियों का दावा है कि 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा के प्रत्येक चरण में TDPL की भूमिका को अलग-अलग देखा जाना चाहिए. प्रारंभिक परीक्षा (PT) में TDPL की कोई भूमिका नहीं थी. मुख्य परीक्षा कुल 950 अंकों की थी और इसमें भी TDPL की कोई भूमिका नहीं थी. साक्षात्कार 100 अंकों का था, जिसमें TDPL की भूमिका बतायी जा रही है. अंतिम मेरिट कुल 1050 अंकों यानी 950 अंक की मुख्य परीक्षा और 100 अंक के साक्षात्कार के आधार पर तैयार हुई.
चयनित पदाधिकारियों का कहना है कि कई ऐसे अभ्यर्थी हो सकते हैं, जिन्होंने मुख्य परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया. लेकिन साक्षात्कार में उन्हें अपेक्षाकृत कम अंक मिले. इसके बावजूद मुख्य परीक्षा में प्राप्त अच्छे अंकों के कारण वे अंतिम मेरिट सूची में जगह बनाने में सफल हुए. उनका तर्क है कि ऐसे अभ्यर्थियों का चयन मुख्य रूप से 950 अंकों की लिखित परीक्षा में उनके प्रदर्शन पर आधारित था, जिसमें TDPL की कोई भूमिका नहीं थी. ऐसे में केवल साक्षात्कार में कथित अनियमितता के आधार पर पूरी परीक्षा रद्द करने का फैसला उन अभ्यर्थियों के साथ भी अन्याय होगा, जिन्होंने प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा अपनी योग्यता और मेहनत के आधार पर पास की है.
पहले प्रभाव का आकलन, फिर हो कार्रवाई
चयनित पदाधिकारियों का कहना है कि यदि साक्षात्कार स्तर पर किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है, तो पहले यह निर्धारित किया जाना चाहिए कि उसका वास्तविक प्रभाव कितना था और उससे कितने अभ्यर्थी प्रभावित हुए. इसके बाद ही मामले की गंभीरता और प्रभाव के अनुरूप उचित एवं अनुपातिक कार्रवाई की जानी चाहिए. उनका कहना है कि जहां PT और 950 अंकों की मुख्य परीक्षा में TDPL की कोई भूमिका नहीं थी, वहां केवल 100 अंकों के साक्षात्कार में कथित अनियमितता के आधार पर पूरी 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा और सभी चयनित अभ्यर्थियों का परिणाम रद्द करना प्रथमदृष्टया अनुपातहीन प्रतीत होता है.