JSSC-CGL और 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा विवाद पर बाबूलाल मरांडी का बड़ा हमला, CBI जांच की मांगBy IANS Thu, 20 August 2026 12:05 PM

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। उन्होंने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा और 11वीं से 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) सिविल सेवा परीक्षाओं की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है।

19 अगस्त को लिखे पत्र में मरांडी ने मौजूदा अपराध अनुसंधान विभाग (CID) जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर राज्य के लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा सरकारी परीक्षा व्यवस्था और जांच एजेंसियों से कमजोर हुआ है।

JSSC-CGL मामले का जिक्र करते हुए भाजपा नेता ने CID जांच को “त्रुटिपूर्ण और संदिग्ध” बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ने छात्रों के बड़े आंदोलन और जनता के बढ़ते आक्रोश के बाद ही कार्रवाई क्यों की। उनका कहना था कि यदि अंततः परीक्षाएं रद्द करनी ही थीं, तो अभ्यर्थियों की शिकायतों पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

मरांडी ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान फर्जी और वास्तविक अभ्यर्थियों के बीच स्पष्ट अंतर करने, परीक्षा से जुड़ी कथित व्यापक साजिश का पता लगाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में CID विफल रही। उन्होंने जांच के दौरान अभ्यर्थियों से कथित वसूली के आरोपों का भी उल्लेख किया और CID अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की।

उन्होंने कहा कि यदि CGL परीक्षा की जांच गंभीरता और निष्पक्षता से की गई होती तथा फर्जी अभ्यर्थियों, वास्तविक अभ्यर्थियों और कथित साजिश में शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट की गई होती, तो राज्य की परीक्षा व्यवस्था और जांच एजेंसियों पर लाखों उम्मीदवारों का भरोसा इस स्तर तक नहीं टूटता।

11वीं से 13वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को लेकर मरांडी ने इंटरव्यू बोर्ड को कथित तौर पर प्रभावित या “फिक्स” किए जाने के आरोपों का भी उल्लेख किया। उन्होंने पूर्व JPSC सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य के निजी सहायक ब्रजराम की गिरफ्तारी का हवाला देते हुए कहा कि इंटरव्यू प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों से कथित वसूली के मामले की भी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।

मरांडी ने उन आरोपों का भी जिक्र किया, जिनमें कहा गया है कि कथित तौर पर कोड को डिकोड कर कुछ विशेष अभ्यर्थियों की पहचान की गई और उन्हें खास इंटरव्यू बोर्ड के सामने बुलाया गया। उन्होंने मांग की कि इंटरव्यू बोर्ड में शामिल सभी अधिकारियों और सदस्यों के बयान दर्ज किए जाएं तथा बोर्ड के गठन, अभ्यर्थियों के आवंटन, कोडिंग-डिकोडिंग प्रक्रिया, प्राप्त अंकों, डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, वित्तीय लेनदेन और अधिकारियों तथा कथित बिचौलियों की भूमिका की वैज्ञानिक एवं स्वतंत्र जांच हो।

नेता प्रतिपक्ष ने यह भी मांग की कि जिन अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में है, उन्हें संबंधित जांच से तत्काल अलग किया जाए। साथ ही, JSSC-CGL मामले में कथित तौर पर सबूत दबाने, वास्तविक दोषियों को संरक्षण देने या लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

मरांडी ने मुख्यमंत्री से JSSC-CGL परीक्षा मामले की जांच तत्काल CBI को सौंपने की मांग की। इसके अलावा उन्होंने 11वीं से 13वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की भी CBI जांच कराने की मांग की।

उन्होंने सरकार द्वारा रद्द की गई 22 परीक्षाओं के साथ-साथ संदेह के घेरे में आई 17 परीक्षाओं, उनके परिणामों और नियुक्तियों की जांच भी CID के बजाय CBI या किसी अन्य स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग रखी।

उन्होंने कहा कि इंटरव्यू बोर्ड में शामिल सभी सदस्यों और अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच के साथ संबंधित रिकॉर्ड, डिजिटल डेटा और अन्य साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित किया जाना चाहिए, ताकि जांच के दौरान किसी भी तरह के सबूत से छेड़छाड़ की संभावना न रहे।

मरांडी ने कथित वसूली और दोषियों को बचाने के आरोपों को लेकर CID अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच की भी मांग की। उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी ने जांच में लापरवाही की, साक्ष्य दबाए या वास्तविक दोषियों को संरक्षण दिया, तो उसके खिलाफ जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष ने इस पूरे विवाद को सिर्फ कुछ परीक्षाओं की अनियमितता का मामला मानने से इनकार किया। उनके मुताबिक, यह झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य, संवैधानिक भर्ती संस्थाओं की विश्वसनीयता और राज्य की पूरी भर्ती व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा विषय है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब झारखंड सरकार ने JPSC और JSSC की ओर से आयोजित कुल 44 भर्ती परीक्षाओं की सूची जारी की है। शिकायतों और CID/SIT जांच में सामने आए तथ्यों के बाद इन परीक्षाओं को रद्द किया गया है। ऐसे में विपक्ष की CBI जांच की मांग ने राज्य की भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रही राजनीतिक और प्रशासनिक बहस को और तेज कर दिया है।