
रांची: 13वीं झारखंड राज्य संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा के परिणाम के आधार पर नियुक्त डिप्टी कलेक्टर समेत अन्य अधिकारियों के भविष्य पर एक बार फिर सवाल खड़ा हो गया है। परीक्षा प्रक्रिया को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में परीक्षा से संबंधित अधिसूचना को रद्द करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता सोनम कुमारी की ओर से अधिवक्ता सौरव आनंद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप है। याचिका में 1 जनवरी 2024 को हुई परीक्षा से जुड़े परिणाम और उसके आधार पर हुई नियुक्तियों को चुनौती दी गई है।
नियुक्ति के बाद छूटी नौकरी, अब सेवा से बाहर
सोनम कुमारी का कहना है कि 13वीं JPSC परीक्षा में चयन के बाद उन्होंने बिहार में अपनी नौकरी छोड़ दी थी और झारखंड में डिप्टी कलेक्टर के पद पर नियुक्त हुई थीं। राज्य सरकार की ओर से उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र दिया गया था।
इसके बाद उन्होंने अपनी पिछली नौकरी से इस्तीफा दे दिया। हालांकि, परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बाद उनकी नियुक्ति भी विवादों में आ गई और उन्हें सेवा से मुक्त कर दिया गया। अब सोनम कुमारी ने अपनी नियुक्ति और परीक्षा प्रक्रिया को आधार बनाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
उनका कहना है कि परीक्षा में चयन के आधार पर उन्होंने अपनी पिछली नौकरी छोड़ी थी। ऐसे में परीक्षा रद्द होने या नियुक्ति पर असर पड़ने की स्थिति में उनके सामने भविष्य को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
करीब 200 अधिकारियों के भविष्य पर भी सवाल
13वीं JPSC परीक्षा के आधार पर नियुक्त करीब 200 अधिकारियों के भविष्य पर भी इस याचिका का असर पड़ सकता है। इनमें विभिन्न पदों पर नियुक्त अधिकारी शामिल हैं। कई नवनियुक्त अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
अधिकारियों को श्रीकृष्ण लोक प्रशासन संस्थान समेत विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें अलग-अलग जिलों में फील्ड ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था। कुछ अधिकारी फिलहाल प्रशिक्षण अवधि में ही काम कर रहे थे।
अब परीक्षा प्रक्रिया पर उठे सवाल और हाईकोर्ट में दाखिल याचिका के बाद इन अधिकारियों की नियुक्ति के आधार को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। यदि परीक्षा रद्द होती है तो नियुक्त अधिकारियों की सेवा पर क्या असर पड़ेगा, यह बड़ा सवाल है।
रांची पहुंचने लगे नवनियुक्त अधिकारी
मामले को लेकर नवनियुक्त अधिकारियों के बीच भी चिंता बढ़ गई है। कई अधिकारी अपने भविष्य को लेकर जानकारी लेने और आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति समझने के लिए रांची पहुंच रहे हैं।
अब सभी की नजर हाईकोर्ट की सुनवाई पर है। अदालत में याचिका पर होने वाली सुनवाई यह तय करने में अहम होगी कि परीक्षा रद्द होने के बाद नियुक्त किए गए अधिकारियों की सेवा और नियुक्ति को लेकर आगे क्या रास्ता निकलता है।