भाजपा MMDR बिल को लेकर चलाएगी राज्यव्यापी जागरूकता अभियान, भ्रम फैला रहा है झामुमो : आदित्य साहू By Mid Time Bureau Thu, 20 August 2026 06:53 PM

RANCHI : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने JMM सहित विपक्षी पार्टियों द्वारा खनिज संशोधन अधिनियम की खिलाफत को केवल राजनीतिक ड्रामा करार दिया है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा लाये जा रहे MMDR अधिनियम का उद्देश्य राज्य का अधिकार छीनना नहीं, बल्कि खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, समानता, निवेश और विकास को गति देना है। यह अधिनियम देश के खनन क्षेत्र को अधिक कुशल, अनुकूल निवेश और महत्वपूर्ण खनिजों की जरूरत पूरी करने के उद्देश्य से लाया गया है। यह संशोधन केवल झारखंड के लिए नहीं है बल्कि पूरे देश के संदर्भ में किया गया है।  

श्री साहू ने कहा कि JMM आंदोलन और आर्थिक नाकेबंदी की धमकी देकर राज्य में विकास की रफ्तार रोकना चाहती है। केंद्र की जनहितकारी नीतियों को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय JMM को विकास, पारदर्शिता और रोजगार के मुद्दे पर जवाब देना चाहिए।  झारखंड की जनता अब इस राजनीति को पूरी समझ चुकी है। झारखंड सरकार और झामुमो जितनी ऊर्जा एवं ताकत इस अधिनियम पर राज्य वासियों को भ्रमित करने पर खपत कर रही है उतनी ऊर्जा खनिजों के अवैध खनन और इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार को रोकने में लगाती तो राज्य का कायाकल्प हो जाता। 

आदित्य साहू ने कहा कि खनिज संशोधन अधिनियम को लेकर झामुमो सहित विपक्ष की सारी आशंकाएं एवं आरोप, बेबुनियाद और निराधार हैं। अधिनियम का उद्देश्य राज्यों का खनन राजस्व छीनना कतई नहीं है। अधिनियम को लेकर झारखंड सरकार और विपक्ष का आरोप कि राज्यों का खनिज राजस्व छिन जाएगा, पूरी तरह निराधार है। राज्यों को खनिज राजस्व का बड़ा हिस्सा मिलता रहेगा, लेकिन कोई भी राज्य मनमाने ढंग से लगातार बढ़ते उपकर के जरिए पूरे खनन उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता खत्म नहीं कर सकता। रॉयल्टी, डीएमएफ़, नीलामी प्रीमियम, एनएमईटी और जीएसटी में राज्यों की हिस्सेदारी यथावत रहेगी तथा खनन क्षेत्र से होने वाले भुगतानों का लगभग 90 प्रतिशत राज्यों को प्राप्त होता रहेगा। लघु खनिजों पर राज्यों का नियंत्रण पूर्ववत रहेगा। बालू, गिट्टी और साधारण मिट्टी जैसे लघु खनिजों पर राज्य की वर्तमान शक्तियों पर इस अधिनियम का कोई प्रभाव नहीं होगा।

श्री साहू ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा आदिवासी, दलित और पिछड़ों पर इस अधिनियम का असर पड़ने वाला बयान भ्रामक है। भाजपा चाहती है कि खनन से मिलने वाले राजस्व का पारदर्शी और प्रभावी उपयोग आदिवासी, दलित, गरीब, पिछड़े और विस्थापित परिवारों के विकास में हो। परंतु राज्य सरकार इसमें फिसड्डी साबित हुई है। सारंडा का पिछड़ापन इसका बड़ा उदाहरण है। श्री साहू ने कहा कि भाजपा स्पष्ट करना चाहती है कि झारखंड के खनिज संसाधनों पर पहला अधिकार झारखंड की जनता के विकास का है, लुटेरों और माफियाओं का नहीं। भाजपा हर मंच पर अधिनियम के तथ्यों को जनता के सामने रखेगी और जागरूकता अभियान चलाकर JMM के झूठ एवं भ्रम का जवाब देगी। साथ ही इस अधिनियम की प्रतियां भी वितरित की जाएगी। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की बात करने वाली jmm की हेमंत सोरेन सरकार ने पिछले 7 साल में इनका ही दोहन करने का काम किया है। खनिज संपदाओं को तो इस सरकार ने लूटकर और लुटवाकर राज्य को खोखला कर दिया है। इसलिए JMM का इसके खिलाफ आंदोलन केवल अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कवायद है। JMM को झारखंड की जनता को गुमराह करने के बजाय यह बताना चाहिए कि राज्य में वर्षों से चल रहे अवैध खनन, खनिजों की लूट और राजस्व के नुकसान पर उसकी सरकार ने क्या कार्रवाई की? श्री साहू ने कहा कि झारखंड सरकार आदिवासी कल्याण, मंईया सम्मान योजना, अबुआ आवास के नाम पर भ्रम फैलाने, केंद्र पर दोषारोपण करने की बजाय राज्य सरकार को अपने डीएमएफ़टी फंड के इस्तेमाल का हिसाब देना चाहिए। DMFT फंड की बंदरबांट कैसे की गई है, यह किसी से छुपा नहीं है। बालू और पत्थर खदानों के नीलामी न होने से राज्य को लगातार खनन राजस्व का नुकसान हो रहा है।