

RANCHI : देश की सर्वोच्च अदालत ने JPSC CIVIL जज परीक्षा से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। शनिवार को सर्वोच्च अदालत ने याचिका को निरर्थक मानते हुए मामले को निस्तारित कर दिया. शनिवार को CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को अवगत कराया कि झारखंड सरकार ने संबंधित पूरी प्रारंभिक परीक्षा को ही रद्द कर दिया है. इस जानकारी के आधार पर पीठ ने स्पष्ट किया कि जब पूरी परीक्षा ही निरस्त की जा चुकी है, तो संशोधित मेरिट लिस्ट को चुनौती देने का अब कोई औचित्य नहीं रह जाता है हालांकि, अदालत ने याचिका को खारिज करने के बजाय उसे प्रभावहीन मानते हुए निस्तारित किया.
यह मामला JPSC के विज्ञापन संख्या 22/2023 (सिविल जज – जूनियर डिवीजन) के तहत 138 पदों के लिए आयोजित भर्ती प्रक्रिया का है. प्रारंभिक परीक्षा 10 मार्च 2024 को आयोजित की गई थी. आंसर-की को लेकर उठे विवाद के बाद आयोग ने इसमें तीन बार संशोधन किया. 13 मई 2024 को तीसरी संशोधित आंसर-की जारी की गई. इसके बाद दो जुलाई 2024 को जारी रिजल्ट में 1,797 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था, जिनमें से करीब 184 अभ्यर्थी अगले चरण की प्रक्रिया में शामिल हो चुके थे. तीन प्रश्नों के उत्तर पर विवाद गहराने पर झारखंड हाईकोर्ट ने उत्तरों को गलत मानते हुए अंकों की पुनर्गणना और नई मेरिट लिस्ट बनाने का आदेश दिया.हाईकोर्ट के आदेश के बाद जारी नई मेरिट लिस्ट से पूर्व में सफल 35 अभ्यर्थी बाहर हो गए, जिसके खिलाफ वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे.
