जलवायु योजनाओं में अब सुनी जाएगी बच्चों की आवाज, सुरसांग में बाल नेतृत्व संवाद कार्यशालाBy Mid Time Correspondent Sun, 23 August 2026 07:21 PM

Photo: MidTime

स्थानीय विकास और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी योजनाओं में बच्चों की जरूरतों और प्राथमिकताओं को शामिल करने की दिशा में रायडीह प्रखंड के सुरसांग पंचायत में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। रविवार को सुरसांग पंचायत सचिवालय में सिनी (चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट) की ओर से पंचायत और ग्राम सभा के सहयोग से बाल नेतृत्व संवाद एवं मूल्यांकन कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पंचायत स्तर पर तैयार होने वाली विकास एवं जलवायु अनुकूलन योजनाओं में बच्चों की वास्तविक जरूरतों और समस्याओं को शामिल करना तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करना था। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि बच्चों से जुड़े मुद्दों की पहचान केवल बड़ों के माध्यम से नहीं, बल्कि बच्चों की राय और अनुभवों को शामिल करके की जानी चाहिए।

कार्यशाला में पंचायत की मुखिया आशा सुचिता एक्का और सिनी के जिला प्रतिनिधि सह प्रोग्राम ऑफिसर किशोर साहा ने प्रतिभागियों को विषय से संबंधित जानकारी दी। उन्होंने ग्राम स्तर पर ग्राम विकास योजना तैयार करने की प्रक्रिया, समुदाय की भूमिका और बच्चों को योजना निर्माण से जोड़ने के विभिन्न तरीकों पर विस्तार से चर्चा की।

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कार्यक्रम में ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) की प्रक्रिया और उसके महत्व को समझाया गया। इसके साथ ही पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम यानी पेसा के प्रावधानों और ग्राम सभा की भूमिका पर भी जानकारी दी गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि स्थानीय स्तर पर योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए समुदाय की भागीदारी जरूरी है।

कार्यशाला में विशेष रूप से बच्चों से जुड़े मुद्दों की पहचान और उनके समाधान पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि बच्चों की प्राथमिकताओं और सुझावों को जीपीडीपी तथा स्थानीय जलवायु अनुकूलन योजनाओं में शामिल करने से पंचायतों में बाल-अनुकूल विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, स्वच्छता, पेयजल और जलवायु परिवर्तन के स्थानीय प्रभावों जैसी समस्याओं पर योजनाबद्ध तरीके से काम करने में मदद मिल सकती है।

कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, ग्राम सभा सदस्यों, ग्राम प्रधानों, पंचायत सहायकों, बच्चों और अन्य पंचायत हितधारकों को बाल-अनुकूल पंचायत की अवधारणा से अवगत कराया गया। बच्चों को भी अपनी समस्याओं, जरूरतों और सुझावों को पंचायत की योजना प्रक्रिया में खुलकर रखने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

कार्यशाला के दौरान नवनिर्मित ग्राम सभा के सदस्यों और पंचायत के अन्य हितधारकों को सिनी की ओर से सम्मानित किया गया। उनके सामुदायिक योगदान और सक्रिय सहभागिता की सराहना करते हुए भविष्य में भी पंचायत के विकास कार्यों में इसी तरह सहयोग बनाए रखने की अपील की गई।

कार्यक्रम के अंत में पंचायत, ग्राम सभा, जनप्रतिनिधियों और बच्चों के बीच निरंतर संवाद और सहयोग बनाए रखने पर जोर दिया गया। उपस्थित हितधारकों ने बच्चों से जुड़े मुद्दों और उनकी जरूरतों को पंचायत की विकास योजनाओं में प्राथमिकता देने पर सहमति जताई।

कार्यशाला से यह संदेश सामने आया कि जलवायु परिवर्तन और स्थानीय विकास की योजनाएं तभी अधिक प्रभावी हो सकती हैं, जब उन योजनाओं से सीधे प्रभावित होने वाले बच्चों की आवाज को भी निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाए।