

रांची: झारखंड में परिसीमन के मुद्दे को लेकर आदिवासी समाज एक बार फिर लामबंद होने की तैयारी में है। आगामी 30 अगस्त को प्रस्तावित आदिवासी एकता महाजुटान को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने एकजुट होकर कार्यक्रम को सफल बनाने का आह्वान किया है। कार्यक्रम को आदिवासी समाज के युवा चेहरों शशि पन्ना, ज्योत्सना केरकेट्टा, प्रियंका कच्छप, चांदनी बाराइक और अंजू तिर्की ने समर्थन दिया है। वहीं केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की तथा आदिवासी नेता लक्ष्मीनारायण मुंडा ने भी महाजुटान के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की है।
कार्यक्रम को लेकर आयोजित संवाद में वक्ताओं ने परिसीमन को लेकर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। ज्योत्सना केरकेट्टा ने कहा कि आदिवासी समाज को कमजोर करने के लिए परिसीमन के नाम पर एक विशेष तरह का नरेटिव तैयार किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे राजनीतिक हित साधने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज अपने अधिकार, पहचान और अस्तित्व के सवाल पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।
वक्ताओं ने झारखंड की उन सभी राजनीतिक पार्टियों और नेताओं को भी 30 अगस्त के कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया, जिनका संबंध आदिवासी समाज से है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों से ऊपर समाज और जमीन की सुरक्षा का सवाल है। उनका कहना था कि “पहले माटी बचेगी, तभी पार्टी बचेगी।”
शशि पन्ना ने कहा कि परिसीमन के मुद्दे पर आदिवासी समाज को एकजुट होकर अपनी बात रखनी होगी। वहीं प्रियंका कच्छप ने कहा कि यह सिर्फ किसी एक संगठन या राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के भविष्य से जुड़ा विषय है।
ज्योत्सना केरकेट्टा और चांदनी बाराइक ने भी समाज के लोगों से बड़ी संख्या में 30 अगस्त के महाजुटान में पहुंचने की अपील की। केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने कहा कि आदिवासी समाज की एकता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। लक्ष्मीनारायण मुंडा ने भी कार्यक्रम को समर्थन देते हुए कहा कि समाज को अपने अधिकारों और अस्तित्व के सवाल पर सजग रहने की जरूरत है।
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि परिसीमन के जरिए झारखंड की आदिवासी राजनीतिक ताकत को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है और भविष्य में आदिवासी नेतृत्व को प्रभावित करने की साजिश रची जा रही है। हालांकि, इन आरोपों पर भाजपा की ओर से प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं किया गया है।
महाजुटान के आयोजकों ने कहा कि 30 अगस्त को होने वाला कार्यक्रम आदिवासी समाज की एकता, अधिकार और पहचान के सवाल को मजबूती से उठाने का मंच होगा।
