झारखंड के 6,722 बूथों पर एक भी नया वोटर नहीं, रांची के 1,209 केंद्रों की स्थिति सबसे चिंताजनकBy Mid Time Bureau Mon, 31 August 2026 12:25 PM

झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया ने निर्वाचन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राज्य के 6,722 मतदान केंद्र ऐसे हैं, जहां अब तक एक भी फॉर्म-6 नहीं पहुंचा है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रविकुमार ने इसे गंभीरता से लेते हुए सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को बूथवार समीक्षा करने और पात्र युवाओं का नाम मतदाता सूची में जोड़ने की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया है।

आंकड़ों में रांची सबसे पीछे नजर आ रहा है। जिले के 1,209 मतदान केंद्रों से अब तक एक भी नए मतदाता का आवेदन नहीं आया है। इसके बाद पलामू के 592, हजारीबाग के 572, गिरिडीह के 416 और धनबाद के 392 बूथ हैं, जहां फॉर्म-6 की संख्या शून्य है। सिर्फ शून्य आवेदन वाले बूथ ही नहीं, बल्कि बेहद कम आवेदन वाले केंद्रों को लेकर भी निर्वाचन विभाग ने चिंता जताई है। धनबाद में 1,243, गिरिडीह में 1,072, रांची में 981, पलामू में 936 और हजारीबाग में 814 मतदान केंद्र ऐसे हैं, जहां अब तक महज एक से पांच फॉर्म-6 प्राप्त हुए हैं।

दरअसल, एसआईआर के तहत 5 अगस्त को मतदाता सूची का ड्राफ्ट जारी किया जा चुका है। अब 1 अक्टूबर 2026 को अर्हता तिथि मानते हुए 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले पात्र नागरिकों के नाम सूची में शामिल किए जाने हैं। इसके लिए फॉर्म-6 के जरिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 15 सितंबर निर्धारित है। निर्वाचन विभाग के मुताबिक, चुनाव 2024 के बाद करीब दो साल का वक्त बीत चुका है और राज्य में मतदाताओं की संख्या हर साल औसतन करीब चार प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में हर बूथ से करीब 60 नए मतदाताओं के आवेदन आने की उम्मीद की जा रही है। इसके मुकाबले कई बूथों पर एक भी आवेदन नहीं पहुंचना अधिकारियों के लिए बड़ा सवाल है।

इसी वजह से अब बीएलओ को घर-घर जाकर नए और युवा मतदाताओं की पहचान करने का निर्देश दिया गया है। स्कूल-कॉलेजों में भी विशेष अभियान चलाकर 18 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले युवाओं को मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए जागरूक किया जाएगा। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी भी दी जाएगी। वहीं, एसआईआर के दौरान दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर भी निर्वाचन विभाग ने सख्त चेतावनी दी है। किसी दूसरे परिवार के खतियान या वंशावली में अपना नाम जोड़कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने की कोशिश को सामान्य कागजी गलती नहीं माना जाएगा। ऐसे दस्तावेजों के जरिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने या किसी अपात्र व्यक्ति को पात्र साबित करने की कोशिश पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने साफ किया है कि किसी अन्य व्यक्ति की वंशावली में गैर-पारिवारिक व्यक्ति को वंशज के तौर पर दिखाना या गलत जानकारी के आधार पर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का प्रयास दंडनीय है। विदेशी नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल कराने की कोशिश भी कानून के दायरे में आएगी। यानी एक तरफ निर्वाचन विभाग की कोशिश है कि कोई भी पात्र युवा वोटर बनने से न छूटे, तो दूसरी तरफ फर्जी दस्तावेजों के सहारे मतदाता सूची में सेंध लगाने वालों पर भी नजर रखी जा रही है।