मतदाता वृद्धि को बांग्लादेशी घुसपैठ का प्रमाण बताना जनता को गुमराह करने की कोशिश : आलोक कुमार दूबेBy Mid Time Bureau Mon, 31 August 2026 07:25 PM

रांची। प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर संथाल परगना में कथित बांग्लादेशी घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर उठाए गए सवालों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में किसी वर्ग के मतदाताओं की संख्या बढ़ने को सीधे बांग्लादेशी घुसपैठ का प्रमाण बताना तथ्यों से अधिक राजनीतिक प्रचार है।

आलोक कुमार दूबे ने कहा कि बाबूलाल मरांडी ने पाकुड़ में कुल मतदाताओं की वृद्धि 24 प्रतिशत और एक वर्ग विशेष के मतदाताओं की वृद्धि 40.9 प्रतिशत होने का दावा किया है। इसी तरह बरहेट में 40.3 प्रतिशत, लिट्टीपाड़ा में 35.5 प्रतिशत, दुमका में 33.2 प्रतिशत और नाला में 40.3 प्रतिशत की वृद्धि का उल्लेख किया गया है। लेकिन सवाल यह है कि इन मतदाता वृद्धि के आंकड़ों में कितने लोग वास्तव में बांग्लादेशी नागरिक पाए गए? कितनों की नागरिकता की जांच हुई? कितने लोगों के खिलाफ FIR हुई और कितने लोगों को अवैध घुसपैठिया घोषित किया गया?

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची जनगणना नहीं होती और मतदाताओं की संख्या में वृद्धि को किसी विदेशी नागरिक की मौजूदगी का प्रमाण नहीं माना जा सकता। निर्वाचन आयोग स्वयं मतदाता सूची के पुनरीक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया चलाता है। निर्वाचन आयोग का आधिकारिक पोर्टल मतदाता सूचियों के विभिन्न revision years उपलब्ध कराता है।और चुनाव आयोग भाजपा के साथ है।

आलोक कुमार दूबे ने कहा कि भाजपा के पास यदि बांग्लादेशी घुसपैठ का ठोस प्रमाण है तो वह देश के सामने प्रमाण रखे। किसी समुदाय विशेष के मतदाताओं की वृद्धि को बांग्लादेशी बताकर पूरे समुदाय को कटघरे में खड़ा करना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश भी है।

उन्होंने बाबूलाल मरांडी से सवाल किया कि “वर्ष 2014 से केंद्र में भाजपा की सरकार है, गृह मंत्रालय भाजपा के पास है और सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। अगर संथाल परगना में इतने बड़े पैमाने पर बांग्लादेशी घुसपैठ हो रही थी तो पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने क्या कार्रवाई की? कितने लोगों को चिन्हित किया गया? कितनों को गिरफ्तार किया गया? कितनों को निर्वासित किया गया? देश को इसका आंकड़ा क्यों नहीं बताया जाता?”

प्रदेश कांग्रेस महासचिव ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने फर्जी आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र या मतदाता पहचान पत्र बनाया है तो उसकी जाति और धर्म देखे बिना कानून के तहत कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन बिना जांच और प्रमाण के किसी विशेष धर्म के लोगों को बांग्लादेशी घुसपैठिया घोषित करना संविधान और कानून दोनों की भावना के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि 2011 की आधिकारिक जनगणना में झारखंड की धार्मिक एवं जनजातीय आबादी के आंकड़े उपलब्ध हैं, लेकिन 2011 के बाद की जनगणना के आधिकारिक धार्मिक आंकड़ों के अभाव में राजनीतिक दलों द्वारा अलग-अलग अनुमान लगाकर जनसांख्यिकीय भय पैदा करना उचित नहीं है। भारत सरकार की जनगणना व्यवस्था में जिला स्तर तक धर्म और अनुसूचित जनजातियों से संबंधित आधिकारिक आंकड़े प्रकाशित किए गए हैं।

आलोक कुमार दूबे ने कहा कि संथाल परगना आदिवासियों की भूमि, अधिकार और अस्मिता का प्रश्न निश्चित रूप से गंभीर है, लेकिन आदिवासी हितों की रक्षा के नाम पर किसी निर्दोष नागरिक को निशाना बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। भूमि पर अवैध कब्जा हो तो कब्जाधारी के खिलाफ कार्रवाई हो, फर्जी दस्तावेज मिले तो दस्तावेज बनाने वाले पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई हो और विदेशी नागरिकता का प्रमाण मिले तो कानून के मुताबिक निर्वासन की प्रक्रिया अपनाई जाए।

उन्होंने कहा कि भाजपा को घुसपैठ के नाम पर राजनीति करने के बजाय प्रमाण सामने रखना चाहिए। मतदाता सूची में वृद्धि के आंकड़े दिखाकर यह निष्कर्ष निकाल देना कि ये सभी लोग बांग्लादेश से आए हैं, वैज्ञानिक और कानूनी जांच का विकल्प नहीं हो सकता।

आलोक कुमार दूबे ने कहा, “बाबूलाल मरांडी जी, डर और भ्रम की राजनीति बंद कीजिए। अगर एक भी बांग्लादेशी घुसपैठिया है तो कानून के मुताबिक उसे चिन्हित करिए, प्रमाण दीजिए और कार्रवाई करिए। लेकिन भारतीय नागरिकों को केवल धर्म और मतदाता वृद्धि के आंकड़ों के आधार पर घुसपैठिया बताने की राजनीति कांग्रेस बर्दाश्त नहीं करेगी।”

उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता को घुसपैठ का डर नहीं, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आदिवासी अधिकार, जमीन की सुरक्षा और विकास चाहिए। भाजपा को इन मुद्दों पर जवाब देना चाहिए कि संथाल परगना के विकास के लिए उसने क्या किया और इतने वर्षों तक केंद्र की सत्ता में रहने के बावजूद कथित घुसपैठ के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं की।एक तथ्यात्मक मजबूत लाइन, जिसे प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी इस्तेमाल किया जा सकता है:

मतदाता बढ़े हैं तो जांच कराइए, लेकिन मतदाता वृद्धि को बांग्लादेशी घुसपैठ का प्रमाण बताना गलत है—पहले एक-एक व्यक्ति की नागरिकता साबित कीजिए फिर आरोप लगाइए।”