लुईस मरांडी और सुदीप गुड़िया ने मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल, मुआवजे की मांगBy Mid Time Bureau Thu, 10 September 2026 06:25 PM

रांची: हरमू स्थित झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के केंद्रीय कार्यालय में गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित में केंद्रीय कार्यकारिणी सदस्य सह विधायक लुईस मरांडी और तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया ने मध्यप्रदेश के बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के मामले को लेकर भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। लुईस मरांडी ने कहा कि मध्यप्रदेश के बालाघाट में पिछले करीब एक महीने में बैगा और गोंड आदिवासी समुदाय के 30 से अधिक बच्चों की मौत हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने समय रहते बच्चों के इलाज और उनकी देखभाल पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आते रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में बच्चों की मौत अपने आप में गंभीर चिंता का विषय है। यदि सरकार समय रहते स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर होती तो कई बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।


उन्होंने भाजपा पर आदिवासी समाज की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासी समुदाय लंबे समय से जल, जंगल और जमीन के अधिकार के साथ शिक्षा, रोजगार और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की मांग करता रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों की समस्याओं को गंभीरता से लेना सरकार की जिम्मेदारी है। लुईस मरांडी ने मध्यप्रदेश में आदिवासियों के साथ हुई विभिन्न घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने आदिवासी युवक के साथ अमानवीय व्यवहार, युवक को वाहन के पीछे बांधकर घसीटने और आदिवासी महिलाओं के साथ मारपीट जैसी घटनाओं को गंभीर बताते हुए सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की।


वहीं विधायक सुदीप गुड़िया ने कहा कि मध्यप्रदेश के आदिवासी आश्रमों में बच्चों की मौत को सामान्य घटना नहीं माना जा सकता। यह सरकारी व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं में गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मृत बच्चे आदिवासी समुदाय से नहीं होते तो शायद सरकार मामले को इतनी देर तक नजरअंदाज नहीं करती। सुदीप गुड़िया ने कहा कि बड़ी संख्या में बच्चों की मौत के बाद सरकार हरकत में आई और अंततः हाईकोर्ट को मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग की। साथ ही मृत बच्चों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग रखी।


झामुमो नेताओं ने आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा की व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई। इसके अलावा दोनों नेताओं ने केंद्र की MMDR नीति में बदलाव का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियों का असर खनिज संपदा वाले आदिवासी क्षेत्रों पर पड़ेगा और इससे स्थानीय लोगों के अधिकार कमजोर हो सकते हैं।